विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन के प्रधानमंत्री डेनिस श्मीहल से मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने उन्हें सभी तरह की शत्रुता समाप्त करने और बातचीत के रास्ते पर वापस लौटने के भारत के रुख से अवगत कराया। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र से इतर श्मीहल से मुलाकात की।
इससे पहले जयशंकर ने न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 77वें सत्र के दूसरे दिन आतंकवाद, कोविड-19 महामारी, खाद्य सुरक्षा और यूक्रेन संकट से विभिन्न मुद्दों पर प्रमुख देशों के राष्ट्रपतियों से बातचीत की। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से वार्ता में जयशंकर ने जी-20 के महत्व और यूक्रेन संकट के कारण वैश्विक दक्षिण पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर वार्ता की।
घाना और कोमोरोस के राष्ट्रपति से भी मिले
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित बैठक में भाग लेने के लिए जयशंकर 10 दिन की यात्रा पर अमेरिका गए हैं। इस दौरान बैठक में घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो एडो और कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली असौमानी से वार्ता की। इनके अलावा, निकारागुआ के विदेश मंत्री डेनिस मोंकाडा, ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री अलेक्जेंडर शालेनबर्ग, लीबियाई विदेश मंत्री नजला अल-मंगौश और तुर्किये के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू से भी मुलाकात कर अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की।
जयशंकर ने ट्वीट किया कि घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो से आतंकवाद से मुकाबला करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सहयोग करने पर चर्चा की। वहीं कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली से द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। जयशंकर ने विदेश मंत्रियों के साथ भारत-यूएई-फ्रांस की एक त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया और रणनीतिक भागीदारों के बीच विचारों का आदान-प्रदान किया।
निकारागुआ के विदेश मंत्री भी हुई चर्चा
उन्होंने निकारागुआ के विदेश मंत्री डेनिस मोनकाडा से वैश्विक स्थिति और इसके बहुपक्षीय प्रभावों पर वार्ता की। इस दौरान लीबिया से बातचीत में उभरती स्थिति पर उनके दृष्टिकोण की सराहना की। अपने ऑस्ट्रियाई समकक्ष के साथ गतिशीलता और शिक्षा में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत-अमेरिका संबंधों पर भी बोले जयशंकर
इस बीच कोलंबिया विश्वविद्यालय में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 50 साल तक हम अमेरिका को शक की नजर से देखते रहे। अमेरिका द्वारा स्पष्ट लाभ की पेशकश के बावजूद हम 2008 के परमाणु समझौते के दौरान संघर्ष करते रहे, क्योंकि अमेरिका के प्रति हमारे सहज और गहरे संदेह ने हमें पीछे कर दिया। इसके बाद पूर्व की धारणाओं को दूर करने और हमारे बीच संबंध बनाने के लिए बहुत प्रयास किए गए हैं।
चीन पर भी बोले जयशंकर
कोलंबिया विश्वविद्यालय में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन मसले पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में हमने जो सबसे बड़ी चीज देखी है, वह है चीन का उदय। यह नाटकीय ढंग से बढ़ा है। एक-दूसरे को समायोजित करना पारस्परिक हित में है, क्योंकि एशिया का उदय तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के एक-दूसरे के साथ मिलने पर निर्भर है।