जब लोगों का पलायन हुआ, अधिकतर ट्रेनें चल रही थीं। लोगों ने इन्हीं का उपयोग किया। अचानक ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई। कोरोना वायरस के बारे में जगजाहिर तथ्य है कि इसके संक्रमितों में सात से 14 दिन तक संक्रमण के लक्षण भी नहीं दिखते। नतीजा, ट्रेन में मौजूद आम लोग भी संक्रमित होते गए। ट्रेनों से दूसरे यात्रियों में वायरस फैलता रहा।
इटली में डॉक्टरों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है। इससे निपटने के लिए रिटायर्ड चिकित्साकर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिन शहरों में संक्रमण कम है, वहां से डॉक्टर जान का खतरा मोल लेकर ज्यादा संक्रमण वाले शहरों में सेवाएं देने पहुंच रहे हैं। कई ने मरीजों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी है। डॉक्टरों को देश में पहले से ज्यादा सम्मान से देखा जा रहा है। क्यूबा और चीन ने भी डॉक्टर भेजे हैं।
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