इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें इस बात का भरोसा है कि वह कब्जा किए हुए वेस्ट बैंक के बड़े हिस्सों को अमेरिका के समर्थन से इन गर्मियों में अपने देश में मिला लेंगे।
इस्राइल के इंजील ईसाई समर्थकों की ऑनलाइन सभा से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पश्चिम एशिया योजना इस्राइल के दर्जनों स्थानों के साथ ही जॉर्डन घाटी को फिर से इस्राइली नियंत्रण में लाने की परिकल्पना करती है।
नेतन्याहू ने कहा कि अब से कुछ महीने बाद, मुझे यकीन है कि उस प्रतिज्ञा का सम्मान होगा और हम यहूदीवाद के इतिहास में एक और ऐतिहासिक क्षण का जश्न मना पाएंगे।
व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ फिलिस्तीनी समूचे वेस्ट बैंक को स्वतंत्र राज्य का हिस्सा मानते हैं। वे इस योजना पर नेतन्याहू के आगे बढ़ने की सूरत में मौजूदा शांति समझौतों को रद्द करने की चेतावनी पहले ही दे चुके हैं। जबकि यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख ने कहा है कि यह विलय अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा और गुट को उचित कदम उठाने पर मजबूर करेगा।
पश्चिम एशिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के राजदूत ने कहा है कि ऐसा कोई भी कदम क्षेत्र में आग लगाने का काम करेगा। लेकिन नेतन्याहू और उनके कट्टर समर्थक, ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए इस योजना पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
गौरतलब हो कि पिछले साल नवंबर महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय की नीति में परिवर्तन करते हुए इस्राइल के वेस्ट बैंक और पूर्व येरुशलम पर कब्जे को मान्यता दे दी थी।
अमेरिकी रक्षा मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि अमेरिका अब वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के तौर पर नहीं देखता। पोम्पियो ने कहा था कि वेस्ट बैंक के कारण ही इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच विवाद रहा है। बार-बार इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहने का कोई फायदा नहीं हुआ। इसकी वजह से शांति की कोशिशें भी नहीं हुई हैं।
बेंजामिन नेतन्याहू ने फैसले को बताया था, ऐतिहासिक गलती में सुधार
इस्राइल की तरफ से अमेरिका के इस फैसले का स्वागत किया गया था। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि यह ऐतिहासिक गलती को सही करने जैसा है। साथ ही उन्होंने अन्य देशों से भी अपील की थी कि वह इस फैसले को मानें।
हालांकि फिलिस्तीन की तरफ से वेस्ट बैंक के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे साएब एरकेत ने कहा था कि अमेरिकी सरकार का यह फैसला वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और शांति के लिए खतरा है। उन्होंने कहा था कि इस तरह का निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून को जंगल के कानून से बदलने जैसा है।