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Israel: नेतन्याहू-न्यायपालिका के बीच बढ़ा गतिरोध; इस्राइल ने अटॉर्नी जनरल को हटाने के लिए मतदान किया

Tue, 05 Aug 2025 01:04 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरूशलम

सार

इस्राइली सरकार ने अटॉर्नी जनरल गली बहाराव-मियारा को हटाने के लिए सोमवार को मतदान किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी है। जहां, पीएम नेतन्याहू और उनके समर्थक आरोप लगा रहे हैं कि अटॉर्नी जनरल सरकार के फैसलों को रोककर अपनी शक्तियों का अतिक्रमण कर रही हैं। वहीं, आलोचकों ने पीएम नेतन्याहू पर न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप लगाया है। 
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बेंजमिन नेतन्याहू, इस्राइली पीएम - फोटो : ANI
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विस्तार
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इस्राइली कैबिनेट ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को अटॉर्नी जनरल गली बहाराव-मियारा को बर्खास्त करने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। इससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और न्यायपालिका के बीच लंबे समय से चल रहा गतिरोध और बढ़ गया है। आलोचक मानते हैं कि यह इस्राइल की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। 

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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस्राइली सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत का कहना है कि जब तक वह यह तय नहीं कर लेती कि यह फैसला सही है या नहीं, तब तक इसे लागू नहीं किया जा सकता है। 

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पीएम और समर्थकों का आरोप- बेवजह सरकार के फैसलों को रोक रहीं गली
पीएम नेतन्याहू और उनके समर्थकों का आरोप है कि अटॉर्नी जनरल गली निर्वाचित सरकार के फैसलों को रोककर अपनी शक्तियों का अतिक्रमण कर रही हैं। उन्होंने इस्राइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख को बर्खास्त करने के एक सरकारी फैसले को रोका, जबकि यह एक गैर-राजनीतिक पद है। उन्होंने कहा कि हितों का टकराव है, क्योंकि पीएम नेतन्याहू और उनके कई पूर्व सहयोगी कई आपराधिक जांचों का सामना कर रहे हैं। 

नेतन्याहू पर न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप
वहीं, आलोचक पीएम नेतन्याहू पर आरोप लगाते हैं कि वे न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करना चाहते हैं और देश की सत्ता को पूरी तरह अपनी गठबंधन सरकार के हाथ में रखना चाहते हैं, इस्राइल के इतिहास में सबसे राष्ट्रवादी और धार्मिक मानी जाती है। वहीं, नेतन्याहू ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि अदालतें और मीडिया उनके खिलाफ मिलीभगत करके उन्हें निशाना बना रहे हैं। 

नेतन्याहू सरकार ने न्यायपालिका में बदलाव का किया था प्रयास
नेतन्याहू सरकार ने 2023 में न्यायपालिका में अमूल-चूल परिवर्तन करने का प्रयास किया था, जिसके चलते महीनों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कई लोगों का मानना है कि सरकार के इस कदम से देश की सुरक्षा कमजोर हो गई, और शायद इसी वजह से सात अक्तूबर 2023 को हमास का बड़ा हमला हो सका, जिससे गाजा में युद्ध शुरू हो गया। 
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नागरिक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की आपात याचिका
गवर्नेंस फॉर क्वालिटी इन इस्राइल नामक एक नागरिक संगठन ने सरकार के इस फैसले को अवैध बताया है और सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि 15,000 से ज़्यादा लोगों ने इस याचिका का समर्थन किया है। एक बयान में, संगठन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि जब वह मौजूदा नियमों के तहत अटॉर्नी जनरल को कानूनी रूप से हटाने में विफल रही, तो उसने नियम ही बदल दिए। संगठन ने नेतन्याहू के चल रहे मुकदमे से जुड़े हितों के टकराव का भी हवाला दिया। समूह ने कहा, 'यह फैसला अटॉर्नी जनरल की भूमिका को एक राजनीतिक नियुक्ति में बदल देता है। जब तक इस गलत फैसले को पलटा नहीं जाता, तब तक कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।'

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