इसराइल में होने वाले आग चुनावों के लिए मंगलवार को मतदान किए जाएंगे। इस चुनाव में हर किसी की नजरें तीन बार से लगातार प्रधानमंत्री पद पर बने हुए बेंजामिन नेतन्याहू पर लगी हैं।
चुनाव का नतीजा अगर उनके पक्ष में आता है तो वे रिकॉर्ड पांचवीं बार देश के मुखिया बनेंगे। इसराइल में 160 दिनों के भीतर दूसरी बार मतदान किए जाएंगे। पिछले बार हुए चुनावों में किसी को भी बहुमत नहीं मिला था।
नेतन्याहू की सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने का सपना उस समय टूट गया, जब सभी के लिए सेना में नौकरी को अनिवार्य बनाने की मांग करते हुए उनके सहयोगी दल एविग्डोर लिबरमैन ने उन्हें समर्थन देने से इंकार कर दिया था।
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बेंजामिन नेतन्याहू पर हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि, वो नेतन्याहू की तरफ से इन सभी आरोपों का खंडन किया जाता रहा है। इसराइल में होने वाले चुनाव उनका राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। साथ ही अगर उनकी प्रचंड बहुमत से सरकार बनती है तो उन्हें कानूनी पचड़ों से भी राहत मिल सकती है।
हाल में हुए चुनावी सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और विपक्षी पार्टी ब्ल्यू एंड व्हाइट पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। ब्ल्यू एंड व्हाइट पार्टी इसराइल के पूर्व सेना प्रमुख बेनी गंट्ज की पार्टी है। अप्रैल में हुए चुनावों में ब्ल्यू एंड व्हाइट पार्टी को 120 सदस्यी संसद में 35 सीटों पर जीत मिली थीं और उसने नेतन्याहू की पार्टी के साथ गठबंधन किया था।
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इसराइल के प्रधानमंत्री नौ सितंबर को एकदिवसीय भारत दौरे पर आने वाले थे, लेकिन चुनावों में व्यस्तता के कारण उन्हें यह दौरा रद्द करना पड़ा। इससे पहले अप्रैल में हुए चुनावों के कारण भी अपना भारतीय दौरा रद्द करना पड़ा था।
दुनिया के तमाम नेताओं के साथ संबंधों में मजबूती दिखाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए किया था।