इस्राइली रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने कहा कि उनकी सेना गाजा पट्टी, लेबनान और सीरिया के कुछ हिस्सों में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों (सिक्योरिटी जोन) में अनिश्चितकाल तक तैनात रहेी। सात अक्तूबर 2023 को हमास की ओर से इस्राइल पर हमले किए गए थे, जिसके बाद इस्राइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपनी सीमाओं का एकतरफा विस्तार कर दिया।
इस्राइल का मानना है कि इन इलाकों पर नियंत्रण रखना भविष्य के हमलों को रोकने के लिए जरूरी है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी क्षेत्र पर बलपूर्वक कब्जा करने अवैध है। कई देशों ने रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए भी इसी दलील का उपयोग किया है।
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क्या हैं सिक्योरिटी जोन
2023 के हमले के बाद इस्राइल ने गाजा की सीमा पर एक बड़ा बफर जोन बनाया और दक्षिणी शहर रफा की घेराबंदी कर ली। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस्राइल अब गाजा के पचास फीसदी से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखता है। काट्ज ने स्पष्ट नहीं किया कि इसमें कौन-कौन से इलाके शामिल हैं।
लेबनान में संघर्षविराम के बाद इस्राइल को अपनी सेना हटानी थी, लेकिन पांच रणनीतिक स्थानों पर इस्राइली सैनिक अब भी तैनात हैं। वहीं, सीरिया में इस्राइली सेना ने गोलन हाइट्स से आगे बढ़कर कुछ गांवों तक अपना नियंत्रण बढ़ा दिया है और सीरियाई सैन्य ठिकानों पर हमले जारी हैं।
पड़ोसी देशों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी
लेबनान और सीरिया ने इस्राइल के कब्जे की निंदा की है और इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। लेकिन उनकी सेनाएं इस्राइल के मुकाबले काफी कमजोर हैं। हिजबुल्ला ने चेतावनी दी है कि अगर इस्राइल ने पीछे हटने से इनकार किया तो संघर्ष दोबारा शुरू हो सकता है। हालांकि उसका सैन्य प्रभाव अब पहले जैसा नहीं है।
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इस पर फलस्तीनी रुख क्या है
फलस्तीनी पूर्वी यरूशलम, वेस्ट बैंक और गाजा को स्वतंत्र राष्ट्र का हिस्सा मानते हैं। ये वहीं इलाके हैं, जिनपर इस्राइल ने 1967 ने कब्जा किया था। हमास का कहना है कि जब तक इस्राइल पूरी तरह गाजा से पीछे नहीं हटता और स्थायी संघर्षविराम की घोषणा नहीं करता, तब तक वह बंधकों को नहीं छोड़ेगा।
अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का क्या कहना है
काट्ज के बयान पर अमेरिका ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस्राइल की सैन्य कार्रवाई का पूरा समर्थन कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इस्राइली कब्जे को मान्यता दी थी और अमेरिकी दूतावास को यरुशलम स्थानांतरिक कर इस्राइल के पूरे शहर पर दावे का समर्थन किया था। ट्रंप ने यहां तक कहा था कि अमेरिका गाजा को कब्जे में लेकर उसे एक पर्यटन स्थल में बदलेगा और फलस्तीनियों को अन्य देशों में बसाया जाना चाहिए। इस पेशकश की फलस्तीनियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने आलोचना की थी।
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