फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Israel Rejects US-Iran Deal: अमेरिका-ईरान समझौते पर इस्राइल का विद्रोही रुख, लेबनान को लेकर खींची लाल रेखा

Mon, 15 Jun 2026 12:24 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव

सार

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते पर इस्राइल ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने कहा कि यह समझौता इस्राइल पर लागू नहीं होता और देश अपनी सुरक्षा नीतियां खुद तय करेगा। उन्होंने लेबनान और हिजबुल्ला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही। आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...
विज्ञापन
ईरान-अमेरिका समझौते पर इस्राइल की बगावत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को लेकर इस्राइल ने पहली बार खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से तैयार हुआ यह समझौता इस्राइल पर लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस्राइल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा वह अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद करेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोकने के लिए एक प्रारंभिक समझौते की घोषणा की है।

क्या इस्राइल ने अमेरिका-ईरान समझौते को मानने से इनकार कर दिया?

बेन-गवीर ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि इस्राइल इस समझौते का हिस्सा नहीं है और इसलिए यह उस पर किसी भी रूप में बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्राइल अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई भी बाहरी समझौता उसके निर्णयों को नियंत्रित नहीं कर सकता। उनके अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से ऊपर इस्राइल की सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा है। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने की कीमत इस्राइल को कई बार चुकानी पड़ी है।

सुरक्षा मंत्री के बयान की बड़ी बातें-

  • ट्रंप का समझौता इस्राइल पर लागू नहीं होता।
  • इस्राइल अमेरिका के अधीन नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है।
  • हम अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप का सम्मान करते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे।
  • यह समझौता हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, इसलिए हम इसके साझेदार नहीं हैं।
  • हिजबुल्ला का पूरी तरह खात्मा होना चाहिए।
  • हम अपने सैनिकों द्वारा कब्जे में लिए गए किसी भी क्षेत्र से पीछे नहीं हटेंगे।
  • लेबनान में सैन्य कार्रवाई की आजादी पर कोई रोक स्वीकार नहीं होगी।
  • उत्तरी सीमा पर फिर से हिजबुल्लाह की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • लेबनान से दागे गए हर ड्रोन, यूएवी या मिसाइल का जवाब सैन्य हमले से दिया जाएगा।
  • हम पहले भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुके और इसकी भारी कीमत चुकाई है।
  • इस्राइल की सुरक्षा किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से ऊपर है।
  • हम अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही फैसला करेंगे।
  • लेबनान को लेकर हमारी लाल रेखा स्पष्ट है, सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।
  • इस्राइल अपनी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर नहीं होने देगा।
  • हमारी सेना जरूरत पड़ने पर हिजबुल्ला के खिलाफ अभियान जारी रखेगी।
विज्ञापन

ये भी पढ़ें- Explainer: अमेरिका-ईरान के समझौते की शर्तें तय, ट्रंप-मोजतबा में कौन झुक रहा, भारत को कितना फायदा-क्या नुकसान?
विज्ञापन

 

लेबनान और हिजबुल्ला को लेकर इस्राइल का रुख इतना सख्त क्यों?

बेन-गवीर ने विशेष रूप से लेबनान और ईरान समर्थित हिजबुल्ला का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्राइल किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता को सीमित करे। उनका कहना है कि हिजबुल्ला का पूरी तरह निष्क्रिय होना इस्राइल की सुरक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्राइली सेना द्वारा सैन्य अभियानों के दौरान कब्जे में लिए गए इलाकों से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं उठता। उनके अनुसार, उत्तरी सीमा पर फिर से ऐसी स्थिति बनने नहीं दी जा सकती जहां हिजबुल्ला के लड़ाके इस्राइली बस्तियों के नजदीक सक्रिय हों।

क्या ड्रोन और मिसाइल हमलों पर इस्राइल ने नई चेतावनी दी?

राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने कहा कि यदि लेबनान की ओर से इस्राइल पर किसी भी प्रकार का ड्रोन, यूएवी या मिसाइल हमला होता है तो उसका जवाब तुरंत और कड़े सैन्य हमले से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले तक जो प्रतिरोधक संतुलन कायम था, उसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। बेन-गवीर का मानना है कि कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया ही भविष्य के हमलों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। उनका यह बयान संकेत देता है कि इस्राइल अपनी सुरक्षा नीति में किसी नरमी के पक्ष में नहीं है।

क्या समझौते के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव बना रह सकता है?

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को क्षेत्रीय शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इस्राइल की प्रतिक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लेबनान और हिजबुल्ला से जुड़े मुद्दों पर इस्राइल अपनी स्वतंत्र सैन्य नीति जारी रखता है, तो क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म होना आसान नहीं होगा। फिलहाल इस्राइल ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी समझौते को तभी स्वीकार करेगा जब उससे उसकी सुरक्षा मजबूत हो। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की कूटनीति और सुरक्षा स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें