इस्राइल में हुए आतंकी हमलों के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मुंहतोड़ जवाब देने का फैसला लिया। 24 घंटे से अधिक समय से गोलीबारी हो रही है। इस्राइली सैन्य कार्रवाई के दौरान गाजा पट्टी में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। हमास के बाद लेबनान से हिजबुल्ला ने भी मोर्टार दागे हैं। संकट गहराने के बीच इस्राइल को भारत समेत कई देशों का समर्थन मिला है। इसी बीच इस्राइल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पूर्व निदेशक ने बताया है कि पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त और उच्च स्तरीय सुरक्षा वाले देश- इस्राइल में देश की जनता की सुरक्षा बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है।
इस्राइल की सैन्य कार्रवाई से करारा जवाब, लेकिन बड़ा सवाल...
दरअसल, हमास ने अंधाधुंध रॉकेट हमलों के बाद आई प्रतिक्रिया में बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आतंकी संगठन हमास ने इस्राइल की संप्रभुता को चुनौती देने की हिमाकत की है। सैन्य कार्रवाई से करारा जवाब दिया जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि हमास के आतंकी हमलों से यहूदियों की धरती कही जाने वाली- इस्राइल की सरकार हालात को कितनी जल्दी सामान्य बना सकेगी। तबाही के मंजर के बीच इस्राइल के वर्तमान हालात को बेहतर तरीके से समझने में इस देश की सुरक्षा परिषद की पूर्व निदेशक हेलिट बरेल का बयान बेहद महत्वपूर्ण है।
हमलों से विचलित करने वाली तबाही, अभी विश्लेषण का समय नहीं
इस्राइल में रक्षा मामलों को करीब से देख चुकीं शीर्ष महिला अधिकारी हेलिट बरेल ने बताया, "हम इस विश्लेषण में नहीं पड़ने की कोशिश कर रहे हैं कि इस समय कैसे और क्या गलत हुआ। हमारे पास इस बात की पूरी जानकारी नहीं है कि हमलों में कौन लोग शामिल हैं।" उन्होंने कहा कि इस्राइल की खराब स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश भर में कई परिवार हिंसा और हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
1800 से अधिक घायल, सैकड़ों की मौत, जवाब की तलाश में इस्राइल
उन्होंने कहा, हमास के हमलों के कारण युद्धग्रस्त इलाकों में स्थिरता कायम किए जाने की जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में 1800 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों और बंधकों का जिक्र करते हुए इस्राइली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पूर्व निदेशक ने कहा, आम जनता से लेकर इस्राइल की चिंता कर रहे सभी लोग और देश की सुरक्षा एजेंसियां चूक कहां हुई, इसका जवाब तलाश रहे हैं। जवाब मिलने तक इस्राइल आराम से नहीं बैठने वाला।
हमले ने इस्राइल को हैरान किया, खुफिया सिस्टम पर सवाल
हेलिट बरेल ने कहा, जब तक हम यह नहीं समझ लेते कि वास्तव में क्या साजिश हुई है, कुछ भी कहना ठीक नहीं। इतना जरूर कहा जा सकता है कि हमास के हमलों के बाद इस्राइल के नागरिकों की सुरक्षा गंभीर खतरे में है। यह बिल्कुल साफ है कि इस हमले ने इस्राइल को हैरान कर दिया है। परिणाम इतने भयानक नहीं होते अगर इस्रायली सेना की खुफिया जानकारी वैसी ही होती जैसी दुनिया भर में इसकी छवि है और हमेशा इससे अतिरिक्त सतर्कता की उम्मीद भी की जाती है। गौरतलब है कि हमलों के बाद इस्राइल की इंटेलिजेंस एजेंसी- मोसाद पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
चप्पा-चप्पा तलाश रही है इस्राइल की सेना
इस्राइली शहर तेल अवीव में मौजूद बरेल ने कहा, वर्तमान में देश युद्ध की भयानक स्थिति का सामना कर रहा है। देश के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई की शुरुआत दक्षिणी सीमा की तरफ से हुई है। उन सभी क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों का पूरा सफाया किया जाएगा, जहां से आतंकवादी घुसपैठ हुई थी। सेनाएं घर-घर और कोने-कोने घूमकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आतंकवादी कहीं छिप न सकें।
कितनी बड़ी होगी सैन्य कार्रवाई
उन्होंने कहा, हमारे पास यह सुनिश्चित करने का बड़ा काम है कि आंतरिक क्षेत्र सहित इस्राइल की सीमा से लगे अन्य सभी क्षेत्र शांत रहें। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद निदेशक के मुताबिक इस्राइल की सेना गाजा पट्टी में बहुत मजबूत प्रतिशोध लेगी। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि सैन्य कार्रवाई इतनी बड़ी होगी, जिसकी हमने निश्चित रूप से पहले कभी कल्पना भी नहीं की होगी।" बता दें कि रॉकेट हमलों के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी विध्वंस की चेतावनी देते हुए हमास के ठिकानों को नेस्तनाबूंद करने की बात कही है।