20 अक्तूबर को खुलने वाले रफा क्रॉसिंग बॉर्डर को इस्राइल की तरफ से बंद रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं हमास ने इस्राइली पीएम नेतन्याहू पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। रफा बॉर्डर का बंद होना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि गाजा के लाखों नागरिकों के लिए जीवनरेखा के रुकने जैसा है। इससे मानवीय संकट और गहरा सकता है।
इस्राइल और हमास के बीच जारी संघर्ष में शनिवार को एक और बड़ा फैसला हुआ। नेतन्याहू सरकार ने गाजा और मिस्र को जोड़ने वाले एकमात्र खुले रास्ते रफा बॉर्डर क्रॉसिंग को 'अगले आदेश तक बंद' रखने का निर्देश दिया है। यह वही रास्ता है जिसके जरिए अब तक गाजा में मानवीय सहायता और लोगों की आवाजाही संभव हो रही थी। इस्राइल ने इस बंदी का सीधा संबंध हमास की तरफ से बंधकों के शव लौटाने से जोड़ा है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा, 'जब तक हमास समझौते के तहत सभी शव वापस नहीं करता, रफा बॉर्डर नहीं खुलेगा।' अब तक हमास दो और बंधकों के शव सौंप चुका है, जिन्हें रेड क्रॉस के जरिए इस्राइल को सौंपा गया।
इस्राइल पर 47 बार युद्धविराम के समझौते का उल्लंघन का आरोप
पिछले कुछ हफ्तों में इस्राइल ने युद्धविराम समझौते का 47 बार उल्लंघन किया है। एक समाचार एजेंसी के अनुसार, इन हमलों में 38 लोगों की मौत और 143 लोग घायल हुए। अक्तूबर 2023 से अब तक गाजा में कुल 68,116 लोग मारे जा चुके हैं और 1,70,200 से ज्यादा घायल हुए हैं। वहीं, इस्राइल में 7 अक्तूबर के हमलों में 1,139 लोगों की मौत और लगभग 200 लोगों को बंधक बनाया गया था।
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फलस्तीनी नागरिकों को लगा बड़ा झटका
रफा बॉर्डर के बंद होने से गाजा के नागरिकों के लिए राहत और वापसी की योजनाओं पर गहरा असर पड़ेगा। इससे पहले मिस्र में स्थित फलस्तीनी दूतावास ने घोषणा की थी कि 20 अक्तूबर को रफा बॉर्डर को दोबारा खोला जाएगा ताकि मिस्र में रह रहे फलस्तीनी नागरिक गाजा लौट सकें। अब यह योजना अधर में लटक गई है।
हमास ने इस्राइली पीएम नेतन्याहू पर लगाया आरोप
इस बीच, हमास ने नेतन्याहू पर 'कमजोर बहाने बनाकर समझौता तोड़ने' का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, तेल अवीव में प्रदर्शनकारियों ने अपने प्रियजनों के अवशेषों को वापस लाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।