इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उनका देश गाजा पट्टी पर कब्जा या उसे अपने देश में मिलाना नहीं चाहता। उनका एकमात्र लक्ष्य हमास को नष्ट करना और फिर गाजा को एक अस्थायी सरकार को सौंपना है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद इस्राइल गाजा की सुरक्षा अपने हाथ में लेना चाहता है।
भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बातचीत में नेतन्याहू ने बताया कि गाजा में अब तक दो मिलियन टन से ज्यादा खाने-पीने का सामान भेजा जा चुका है, लेकिन इन सामग्रियों को रास्ते में रोक दिया गया।
इस्राइल के प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी उस समय आई है, जब गाजा में मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सरकार की भारी आलोचना हो रही है। पिछले 22 महीनों में इस्राइली सैन्य हमलों में करीब 60,000 लोग मारे गए हैं। इस्राइल ने यह युद्ध सात अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू किया था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था।
ये भी पढ़ें:
छह साल की भारतीय मूल की बच्ची और होटल कर्मचारी...; हाल ही में आयरलैंड में बढ़ी नस्लीय हिंसा ने डराया
नेतन्याहू ने कहा, हमारा मकसद गाजा पर कब्जा करना या उसका अपने में विलय करना नहीं है। हमारा मकसद हमास को खत्म करना, बंधकों को वापस लाना और फिर गाजा को एक अस्थायी सरकार को सौंप देना है। उन्होंने कहा, हम गाजा को कभी भी फलस्तीनी प्राधिकरण या हमास के हवाले नहीं करेंगे। हम वहां की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेंगे और वहां एक सुरक्षा घेरे का निर्माण करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा, हम चाहते हैं कि यह युद्ध जल्द से जल्द खत्म हो। अगर हमास हथियार डाल दे और बंधकों को रिहा कर दे, तो युद्ध कल ही खत्म हो सकता है। यहां तक कि गाजा के फलस्तीनी भी अब हमास से लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस्राइल गाजा को एक 'निःशस्त्रीकृत क्षेत्र' (डी-मिलिटराइज्ड जोन) बनाना चाहता है। उन्होंने कहा, हम युद्ध को जल्द खत्म करना चाहते हैं और इस जीत पर फोकस कर रहे हैं।
गाजा में भोजन और दवाइयों की भारी कमी को लेकर भी इस्राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। लेकिन नेतन्याहू ने इस आलोचना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, हमने अब तक 2 मिलियन टन से ज्यादा खाद्य सामग्री गाजा भेजी है। लेकिन ये सामग्री बीच में रोक दी गई। हमने हजारों ट्रकों को गाजा जाने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा, मैंने ही सहायता ट्रकों के लिए रास्ते खोलने का फैसला किया था। समस्या वितरण में है। हमास ने ही मानवीय संकट को जन्म दिया है।
ये भी पढ़ें:
'डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के लिए संयुक्त अरब अमीरात एक संभावित जगह', पुतिन का बड़ा बयान
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारत आएंगे, तो नेतन्याहू ने कहा कि वह जल्द ही भारत आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इस्राइल के बीच सहयोग बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं, खासकर खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि यह दोनों देशों के हित में होगा कि इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।