ईरान के शहरों में इस्राइल-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई चौंकाने वाली मानी जा रही है। दरअसल, एक दिन पहले ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमले अभी भी विचाराधीन हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि ऐसी कार्रवाई वर्षों तक चलने वाले संघर्ष में तब्दील हो जाएगी। वहीं, इस्राइली अधिकारी के बयान से साफ है कि ये जंग अब आसानी से रुकने वाली नहीं है।
अमेरिका और इस्राइल ने शनिवार को संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान के कई शहरों पर हवाई हमलों को अंजाम दिया। इन हमलों के साथ ही पश्चिम एशिया में एक और जंग शुरू हो गई है। ईरान के खिलाफ युद्ध के लंबे समय तक चलने की संभावना है। एक शीर्ष इस्राइली अधिकारी ने इस संभावना की पुष्टि भी कर दी है।
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एक शीर्ष इस्राइली अधिकारी के अनुसार, इस्राइल ईरान के साथ कई दिनों तक चलने वाले संघर्ष की तैयारी कर रहा है। अधिकारी के अनुसार, शनिवार सुबह अमेरिका के साथ संयुक्त रूप से किए गए हमलों में ईरानी शासन के ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
महीनों से बन रही थी संयुक्त कार्रवाई की योजना
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई की योजना महीनों से बनाई जा रही थी। वहीं, दिनदहाड़े हुए इस हमले का उद्देश्य ईरान को चौंकाना था। एक अज्ञात सुरक्षा सूत्र ने चैनल 12 को बताया कि इस ऑपरेशन की योजना महीनों से संयुक्त रूप से बनाई जा रही थी।
सूत्रों के अनुसार, इस अभियान में इस्राइल पूरी ताकत लगा रहा है और अमेरिका भी इस मामले में उसके साथ है। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त हमले का 'प्रारंभिक चरण' चार दिनों तक चलने की योजना है। टीवी रिपोर्ट में कहा गया है कि सुबह के समय शुरुआती हमलों का समय ईरानियों को चौंकाने के लिए तय किया गया था, क्योंकि उन्हें दिन के समय हमले की उम्मीद नहीं थी।
एक दिन पहले ही जेडी वेंस ने खारिज किया था लंबे युद्ध का विकल्प
ये हमले इस वजह से भी चौंकाने वाले माने जा रहे हैं, क्योंकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया कि अमेरिका मध्य पूर्व में किसी लंबे युद्ध का हिस्सा बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के विरुद्ध नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हों, लेकिन अमेरिका के एक और लंबे क्षेत्रीय संघर्ष में शामिल होने की कोई संभावना नहीं है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों को लेकर वार्ता जारी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था है कि वह ईरान के साथ हाल ही में हुई अमेरिकी वार्ता की प्रगति से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और उसके पास यूरेनियम संवर्धन की क्षमता नहीं होनी चाहिए।