बांग्लादेश के मक्का रक्षा गठबंधन में शामिल होने के संकेतों के बीच पाकिस्तान से उसकी नजदीकी तेजी से बढ़ी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के सैन्य और सुरक्षा संपर्क भी बढ़े हैं। क्या पाकिस्तान अब इस्लामी देशों के नए सुरक्षा नेटवर्क के जरिये भारत पर दबाव बनाने की तैयारी में है? पढ़िए रिपोर्ट
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की अगुवाई वाले मक्का रक्षा गठबंधन में बांग्लादेश भी शामिल होने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। ढाका में तमाम मंत्रियों ने ऐसे बयान दिए हैं, जिनसे इसके पुख्ता संकेत मिलते हैं कि बांग्लादेश मक्का रक्षा गठबंधन में शामिल होने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन
यह साफतौर पर देखा जा सकता है कि ऑपरेशन सिंदूर में पिटने के बाद पाकिस्तान ने अपने रणनीतिक विकल्पों का विस्तार करने की नीति अपनाई है। इधर सोमवार को इस्तांबुल में मुस्लिम नाटो देशों की पहली अहम बैठक में गठबंधन को संस्थागत ढांचा देने पर सहमति बनी। इस बैठक में अन्य मित्र देशों को गठबंधन से जोड़ने का रोडमैप बनाने का फैसला भी हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई तेजी : ऑपरेशन सिंदूर के बाद ढाका और इस्लामाबाद के बीच सैन्य और सुरक्षा संपर्कों में उल्लेखनीय तेजी आई है। दोनों देशों की सेनाओं और खुफिया तंत्र के बीच बनी नजदीकी एक बड़े बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे की ओर बढ़ती दिख रही है। मई 2025 के बाद दोनों देशों के बीच कम से कम 7 प्रमुख सैन्य और सैन्य-खुफिया स्तर के संपर्क सामने आए हैं। अगस्त 2025 में बांग्लादेश के लेफ्टिनेंट जनरल एमडी फैजुर रहमान ने रावलपिंडी में पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल साहिर शमशाद मिर्जा से मुलाकात की, अक्तूबर में पाकिस्तानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने ढाका में तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठकें कीं, नवंबर में दोनों देशों की सेनाओं के बीच आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता की शुरुआत हुई। जनवरी 2026 में बांग्लादेशी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान पाकिस्तान गए, जेएफ-17 विमान, साइबर कमांड और एयरोस्पेस पार्क का दौरा किया।
भारत की चिंता बढ़ा रही नजदीकी
भारत के लिए मुख्य चिंता रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच गहरे होते संबंध हैं। यदि बांग्लादेश मक्का रक्षा समझौते में शामिल होता है, तो भारत के पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में बांग्लादेश एक ऐसे व्यापक सुरक्षा नेटवर्क से जुड़ जाएंगे जिसमें सऊदी अरब और तुर्किये भी शामिल हैं। ऐसे में भविष्य में किसी भी संकट के समय भारत को पाकिस्तान की सैन्य प्रतिक्रिया के साथ ढाका की भूमिका भी देखनी होगी। पाकिस्तान भारत के खिलाफ सामरिक मोर्चेबंदी करना चाहता है, ताकि भविष्य में यदि भारत ऑपरेशन सिंदूर जैसा आतंकरोधी कदम उठाए, तो पाकिस्तान इस्लामिक एकजुटता के जरिए भारत पर दबाव बना सके।