20 अगस्त को इस्लामाबाद में एक रैली के दौरान इमरान खान ने अपने सहयोगी शाहबाज गिल के साथ हुए व्यवहार को लेकर शीर्ष पुलिस अधिकारियों, चुनाव आयोग और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की धमकी दी थी। गिल को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय बड़ी पीठ ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने एक महिला न्यायाधीश को धमकी देने से जुड़े एक मामले में उनका लिखित जवाब स्वीकार कर लिया। उन्हें जारी किया गया कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिया गया।
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इससे पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख कोर्ट के सामने पेश हुए। मामले की सुनवाई पांच सदस्यीय वृहद पीठ ने की। पीठ के अध्यक्ष इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनाल्ला थे। पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कयानी, मियांगुल हसन औरंगजेब, तारिक महमूद जहांगीरी और बाबर सत्तार शामिल थे।
20 अगस्त को इस्लामाबाद में एक रैली के दौरान इमरान खान ने अपने सहयोगी शाहबाज गिल के साथ हुए व्यवहार को लेकर शीर्ष पुलिस अधिकारियों, चुनाव आयोग और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की धमकी दी थी। गिल को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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उन्होंने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जेबा चौधरी के फैसले पर भी आपत्ति जताई थी, जिन्होंने राजधानी क्षेत्र पुलिस के अनुरोध पर गिल की दो दिन की हिरासत को मंजूरी दी थी। इमरान ने कहा था कि उन्हें खुद को तैयार करना चाहिए क्योंकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भाषण के कुछ घंटों बाद ही इमरान खान पर पुलिस, न्यायपालिका और अन्य राज्य संस्थानों को धमकाने के लिए मामला दर्ज किया गया था।
इससे पहले रविवार को महिला जज को धमकाने के मामले में स्थानीय अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई थी। सप्ताहांत की छुट्टी के बावजूद अपने कक्ष में सुनवाई कर जज मोहसिन अख्तर कयानी ने इमरान को 10 हजार रुपये जमा कराने की शर्त पर अंतरिम जमानत दे दी थी। साथ ही उनसे सात अक्तूबर से पहले स्थानीय अदालत में पेश होने को कहा गया था।