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ईरान में विरोध-प्रदर्शन जारी: सर्वोच्च नेता खामेनेई ने तोड़ी चुप्पी, अमेरिका और इस्राइल की साजिश करार दिया

Mon, 03 Oct 2022 09:06 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला , तेहरान

सार

ईरान के सरकारी टीवी ने बताया है कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा अधिकारियों के बीच हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या 41 तक हो सकती है। वहीं, लंदन स्थित एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि इससे अधिक लोगों की मौत हुई है। 
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आयतुल्लाह अली खामनेई - फोटो : social media
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विस्तार
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोमवार को सार्वजनिक रूप से ईरान में हो रहे सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने इसे दंगा करार देते हुए अमेरिका और इस्राइल पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने का आरोप लगाया। खामेनेई ने कहा कि ईरान की नैतिकता पुलिस की हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत से उनका दिल टूट गया था, जिसके बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। हालांकि, उन्होंने ईरान को अस्थिर करने के लिए विरोध-प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार देते हुए इसकी तीखी निंदा की।  

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खामेनेई बोले, दंगे की योजना बनाई गई 
उन्होंने तेहरान में पुलिस छात्रों के एक कैडर को बताया कि इस दंगे की योजना बनाई गई थी। इन दंगों और असुरक्षाओं को अमेरिका और इस्राइली शासन और उनके कर्मचारियों ने तैयार किया है। उन्होंने सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए सिर के स्कार्फ को फाड़ने और मस्जिदों, बैंकों और पुलिस कारों में आग लगाने के दृश्यों को असामान्य और अप्राकृतिक बताया। उनकी टिप्पणी तब आई है जब महसा अमिनी की मौत के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन सरकार के प्रयासों के बावजूद तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया।

17 वर्षीय निका की निर्मम हत्या
ईरान में 22 वर्षीय महसा अमिनी की हिजाब के विरोध में पुलिस हिरासत में मौत के बाद कई महिलाओं से पुलिस बर्बरता सामने आ रही है। अब यहां 17 वर्षीय निका शकरामी की निर्मम हत्या कर दी गई। उसे शनिवार को प्रदर्शन के दौरान आखिरी बार देखा गया। देश में 16 सितंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद से अब तक 92 आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है। इस बीच शनिवार को हिजाब विरोधी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही निका शकरामी को भी बेरहमी से मार डालने का आरोप लगा है। वह शनिवार से ही गायब चल रही थी। रविवार रात को जब उसके परिजनों को पुलिस स्टेशन बुलाकर शव सौंपा गया तो उसकी नाक कटी हुई पाई गई। साथ ही सिर पर भी 29 घाव थे। निका की मौत के बाद सोमवार को लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हिजाब विरोधी प्रदर्शन ईरान के 164 शहरों में फैल चुका है।
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महसा की मौत से लंबे समय से पनपा तनाव आया सामने 
महसा अमिनी की मौत के विरोध ने ईरान में लंबे समय से पनप रहे तनाव को सामने ला दिया है, जिसमें देश में बढ़ती कीमतों, उच्च बेरोजगारी, सामाजिक प्रतिबंध और राजनीतिक दमन शामिल हैं। तेहरान और दूर-दराज के प्रांतों में प्रदर्शन जारी हैं, यहां तक कि अधिकारियों ने बाहरी दुनिया में इंटरनेट की पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है और सोशल मीडिया ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है। जैसे ही इस सप्ताह नया शैक्षणिक वर्ष शुरू हुआ छात्र पूरे ईरान के विश्वविद्यालयों में विरोध में जमा हुए। सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए वीडियो के अनुसार, इन छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए और प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई की निंदा की।  

छात्रों का उग्र विरोध-प्रदर्शन जारी 
मध्य ईरान में इस्फहान, उत्तर-पूर्व में मशहद और पश्चिम में करमानशाह सहित प्रमुख शहरों में विश्वविद्यालयों ने छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है। छात्रों की भीड़ ने ताली बजाई, नारे लगाए और हिजाब जलाए। तेहरान की राजधानी में शाहिद बेहेश्ती विश्वविद्यालय में छात्रों ने चिल्लाते हुए कहा, इसे विरोध मत कहो, यह अब एक क्रांति है। देश के उत्तर में माजंदरान विश्वविद्यालय में छात्रों की भीड़ का नारा लगाया, ईरान के कानून के विरोध में महिलाओं ने अपने हिजाब उतार दिए और उन्हें आग लगा दी। छात्र जाग रहे हैं, वे नेतृत्व से नफरत करते हैं! 

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