फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका ने ईरान से जंग में फूंके 38 अरब डॉलर; कितने विमान गंवाए, हर महीने कितना खर्च?

Wed, 16 Sep 2026 05:14 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।

सार

ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका की लागत लगातार बढ़ रही है और अब तक 38 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुका है। युद्ध के साथ महंगाई, तेल-गैस की आपूर्ति और अमेरिकी सैन्य साजो-सामान पर भी असर पड़ा है। आखिर हर महीने बढ़ता यह खर्च अमेरिका के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन रहा है? पढ़िए रिपोर्ट
विज्ञापन
अमेरिका ने जंग में फूंके 38 अरब डॉलर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ईरान के खिलाफ युद्ध पर 1 अगस्त तक अमेरिका के रक्षा विभाग के 38 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। यह खर्च आगे भी जारी रहेगा। युद्ध की स्थिति और उसकी तीव्रता के आधार पर हर महीने तीन अरब डॉलर या उससे ज्यादा खर्च हो सकते हैं। यह आकलन मंगलवार को गैर-दलीय संस्था कांग्रेसनल बजट कार्यालय (सीबीओ) ने जारी किया।
विज्ञापन


सीबीओ ने कहा कि इस युद्ध का असर महंगाई पर 2027 की पहली तिमाही तक रह सकता है। इसके कारण महंगाई पहले के अनुमान से करीब 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा रह सकती है। इसकी बड़ी वजह तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से इनकी आवाजाही प्रभावित हुई है। लाल सागर से होने वाली जहाजों की आवाजाही में भी बाधा आई है।

यह अनुमान प्रतिनिधि ब्रेंडन बॉयल के जानकारी मांगने के बाद तैयार किया गया। बॉयल प्रतिनिधि सभा की बजट समिति में सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य हैं। सीबीओ का यह अनुमान पहले दिए गए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुमान से काफी मिलता है। हेगसेथ ने सीनेट में गवाही के दौरान युद्ध की लागत 37.5 अरब डॉलर बताई थी।
विज्ञापन


सीबीओ के मुताबिक, इस खर्च का बड़ा हिस्सा युद्ध में इस्तेमाल हुई या नष्ट हुई मिसाइलों, हथियारों और सैन्य उपकरणों को फिर से खरीदने पर हो रहा है। इसमें युद्ध में मारे गए या घायल हुए अमेरिकी सैनिकों का खर्च शामिल नहीं है। इसमें भविष्य में सैनिकों की स्वास्थ्य देखभाल और विकलांगता मुआवजे का खर्च भी शामिल नहीं किया गया है।

ब्रेंडन बॉयल ने कहा कि युद्ध की मानवीय कीमत के अलावा अमेरिकी लोगों को इसकी आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सीबीओ की गैर-दलीय रिपोर्ट से साफ है कि युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं। खर्च अभी भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम लोगों के लिए चीजों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।

ये भी पढ़ें: ट्रंप जूनियर की पार्टी का रूस कनेक्शन: पुतिन से करीबी का जिक्र क्यों, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कैसे किनारा किया?

बॉयल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन कई वर्षों से अमेरिकी लोगों से कहते रहे हैं कि देश में परिवारों की मदद करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। लेकिन उनके मुताबिक, सरकार एक ऐसे युद्ध पर अरबों डॉलर खर्च कर सकती है, जिसे उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध की कीमत आखिरकार अमेरिकी लोगों को चुकानी पड़ रही है।

50 से ज्यादा विमान-हेलिकॉप्टर और ड्रोन गंवाए

ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से 30 जून तक चले ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिका को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पेंटागन के महानिरीक्षक की सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों और युद्ध से जुड़े हादसों में अमेरिका के 50 से ज्यादा विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए। इनमें 30 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी मिसाइल  व ड्रोन हमलों से कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इराक, ओमान व जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा।

ईरानी हमले में तबाह बोइंग ई-3 सेंट्री

अमेरिका ने ये विमान खोए : अमेरिका के चार एफ-15ई लड़ाकू विमान नष्ट हुए। इसके अलावा ए-10 थंडरबोल्ट- एक, ई-3 सेंट्री- एक व एक एएच-64 अपाचे भी गंवाया। एक एफ-35ए और 7 केसी-135 विमान भी क्षतिग्रस्त हुए। इनमें से एक 12 मार्च को इराक में ईंधन भरने के मिशन में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें सभी छह सदस्यों की मौत हो गई थी।  
विज्ञापन


गोला-बारूद के भंडार पर बढ़ा दबाव : रिपोर्ट ने अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर बढ़ते दबाव तथा आपूर्ति शृंखला में बाधाओं की ओर भी इशारा किया है। ट्रंप ने हथियारों की कमी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका इतिहास में सबसे अधिक आधुनिक हथियार बना रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें