फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर चिंता नहीं': ईरान बोला- सब दुश्मनों का दुष्प्रचार, अर्थव्यवस्था पर क्या कहा?

Sat, 19 Sep 2026 08:13 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

ईरान ने जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर देश के लोगों को चिंता न करने की अपील की है। ईरान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अली जेइनिवंद ने कहा कि देश में जरूरी सामान की आपूर्ति बेहतर तरीके से चल रही है, हालांकि बड़ी मात्रा में आयात के कारण भंडारण की जगह की कमी हो रही है। उन्होंने घरेलू उत्पादों की बढ़ती कीमतों को भी स्वीकार किया। ऐसे में सवाल है कि अमेरिकी आर्थिक दबाव के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना असर पड़ रहा है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
क्या ईरान में महांगाई बढ़ रही? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तेहरान में ईरान के उप गृह मंत्री और गृह मंत्रालय के राजनीतिक मामलों के प्रवक्ता अली जेइनिवंद ने शनिवार को कहा कि देश में जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जरूरी सामान की कमी से जुड़ी खबरों को दुश्मनों का दुष्प्रचार बताते हुए कहा कि सरकार इस क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि घरेलू उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और इसे नियंत्रित करने के लिए अधिकारी कदम उठा रहे हैं।

ईरान में जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर सरकार ने क्या कहा?

जेइनिवंद ने कहा कि ईरान के लोगों को जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और जरूरी सामान की उपलब्धता बनाए रखने के लिए व्यवस्था बेहतर तरीके से चल रही है। उन्होंने लोगों से ऐसी खबरों से प्रभावित नहीं होने को कहा, जिन्हें ईरान सरकार दुश्मनों का झूठा दुष्प्रचार मानती है। हालांकि, उन्होंने एक व्यावहारिक समस्या का भी जिक्र किया। देश में जरूरी सामान का आयात बड़ी मात्रा में हो रहा है, जिसके कारण सामान रखने के लिए भंडारण सुविधाओं की कमी सामने आ रही है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें- छात्रों की गूंज: 'भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था का खामियाजा बच्चे भुगत रहे', राहुल के भाषण की पांच बड़ी बातें

ज्यादा आयात के कारण ईरान के सामने क्या समस्या आई?

ईरान के उप गृह मंत्री ने बताया कि जरूरी सामान बड़ी मात्रा में देश में आ रहा है। ऐसे में मौजूदा भंडारण सुविधाएं पर्याप्त नहीं पड़ रही हैं। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए निजी क्षेत्र से मदद मांगी है। यानी सरकार चाहती है कि निजी कंपनियां और कारोबारी सामान को सुरक्षित रखने के लिए उपलब्ध भंडारण क्षमता बढ़ाने में सहयोग करें। जेइनिवंद के बयान से यह साफ है कि सरकार जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर आश्वस्त है, लेकिन उसकी भंडारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

क्या ईरान में सामान की कीमतें बढ़ रही हैं?

जेइनिवंद ने देश में घरेलू उत्पादों की बढ़ती कीमतों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से इस समस्या को दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कीमतें कितनी बढ़ी हैं या उन्हें नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से विशेष उपाय किए जा रहे हैं। ऐसे में ईरान के सामने एक तरफ जरूरी सामान की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और दूसरी तरफ घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है।

अमेरिका के आर्थिक दबाव के बीच ईरान का यह बयान क्यों अहम है?

ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले महीने ईरान को मदद देने वाले किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी। ट्रंप ने इसे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करने की कार्रवाई बताया था। अमेरिकी दबाव का मकसद ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। ऐसे माहौल में ईरान का जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर लोगों को आश्वस्त करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमेरिका से बातचीत को लेकर ईरान का रुख क्या है?

ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने मंगलवार को कहा था कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। यह बयान ट्रंप के उस बयान के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान जल्द और बुरी तरह समझौता करना चाहता है और अमेरिका उसके साथ बातचीत फिर शुरू कर सकता है। रजाई ने ट्रंप के बयानों को लेकर कहा कि लोगों को अमेरिका के अलग-अलग संकेतों से भ्रमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान की शर्तें पूरी होने तक कोई बातचीत नहीं होगी।

तेल और रणनीतिक जलमार्ग को लेकर भी क्यों बढ़ा तनाव?

रजाई ने अपने बयान में तेल और जलडमरूमध्य से जुड़े बदलते हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से कभी बातचीत नहीं करने और कभी बातचीत के लिए तैयार होने के अलग-अलग संकेतों से ध्यान भटकना नहीं चाहिए। उनका कहना था कि तेल और जलडमरूमध्य से जुड़े दांव अब बदल चुके हैं। इस बीच ईरान जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर अपने नागरिकों को आश्वस्त कर रहा है और सरकार भंडारण व्यवस्था में निजी क्षेत्र की मदद चाहती है। इससे साफ है कि ईरान एक तरफ घरेलू आपूर्ति और कीमतों की स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है, वहीं अमेरिका के साथ आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के बीच अपना सख्त रुख भी बनाए हुए है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें