ईरान ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सामने एक नई मुद्रा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है। ईरान ने कहा है कि एससीओ के सदस्य देशों को उसी प्रस्तावित मुद्रा के जरिए आपस में कारोबार करना चाहिए। ईरानी प्रस्ताव के बारे में जानकारी गुरुवार को ईरान की समाचार एजेंसी ईरना ने दी। उसके मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री मेहदी सफारी ने ये प्रस्ताव एससीओ को भेजा है।
विश्लेषक बेन नॉर्टन ने वेबसाइट मल्टीपोलिरिस्टा.कॉम पर लिखी एक टिप्पणी में कहा है कि ईरान की ये पेशकश दूरगामी महत्त्व वाली है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि ब्राजील के अगले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार लूला दा सिल्वा ने वादा किया है कि वे सत्ता में आए, तो लैटिन अमेरिकी देशों के लिए वे ‘सुर’ (दक्षिण) नाम से एक नई मुद्रा लॉन्च करेंगे, ताकि ये देश बिना डॉलर का इस्तेमाल किए आपस में कारोबार कर सकें। ब्राजील में चुनाव अगले अक्तूबर में होगा। ताजा जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक लूला के पहले दौर के ही मतदान में राष्ट्रपति चुन लिए जाने की मजबूत संभावना है।
बीते 26 मई को एससीओ की 17वीं फोरम मीटिंग ऑनलाइन माध्यम से हुई। इसकी अध्यक्षता रूस ने की। इसमें एससीओ देशों के बीच ‘अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंध के क्षेत्रों में अधिक गहरे रिश्ते’ बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। चीन और रूस समेत एससीओ के कई सदस्य देशों के खिलाफ पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। समझा जाता है कि इसी कारण इन देशों में डॉलर के विकल्प के रूप में अपनी मुद्रा तैयार करने का विचार आया है।
रूस और चीन के बीच आपसी मुद्रा में कारोबार में बीते तीन महीनों में भारी बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग के मुताबिक बीते तीन महीनों में इन दोनों देशों के बीच चार बिलियन डॉलर का भुगतान रुबल और युवान में हुआ। ऐसी खबरें हैं कि इस अवधि में भारत और रूस के बीच भी रुबल और रुपये में व्यापार में वृद्धि हुई है।