ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान
- फोटो : एक्स/@मसूद पेजेशकियान
ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक बार फिर से लेबनान के हिज्बुल्ला समूह के लिए इस्लामी गणतंत्र के समर्थन की बात को दोहराया है और साथ ही फलस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई की निंदा की।
हिजबुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह के लिए जारी किया गया बयान इरानी राष्ट्रपति का पहली विदेश नीति टिप्पणियों में से एक था।
इस्राइल के बेरूत पर कब्जा करने के बाद बनाया गया था हिजबुल्लाह समूह
ईरान हिजबुल्ला को वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान करता है, जिसे लेबनान के गृह युद्ध के दौरान 1982 में कट्टर दुश्मन इस्राइल द्वारा बेरूत पर कब्जा करने के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की पहल पर बनाया गया था।
इब्राहिम रईसी की मौत के बाद राष्ट्रपति बने पेजेशकियान
ईरान में 19 मई को हेलिकॉप्टर हादसे में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत के बाद हुए दूसरे चरण के चुनाव में सुधारवादी नेता और देश में हिजाब के सख्त कानून में कुछ ढील देने के पक्षधर मसूद पेजेशकियान (69) ने जीत दर्ज की है। वह प्रतिद्वंद्वी कट्टरपंथी नेता सईद जलीली को हराकर विजेता घोषित किए गए। पेजेशकियन को 1.63 करोड़ वोट मिले जबकि जलीली को 1.35 करोड़ मत मिले। मसूद को मिले एक करोड़ 63 लाख वोटों में से 50 फीसदी 30 साल से कम उम्र वालों के हैं।
पीएम मोदी ने दी थी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मसूद पेजेशकियन को ईरान का राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर बधाई दी थी। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि हमारे लोगों और क्षेत्र के लाभ के लिए हमारे गर्मजोशी भरे और दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्सुक हूं।
कट्टर विचारधारा के खिलाफ हैं नए राष्ट्रपति पेजेशकियान
मसूद पजेशकियान ने चुनाव से पहले भी राजनीतिक भाषणों के दौरान कई बार हिजाब की खिलाफत की थी। उन्होंने कई बार कहा है कि वो किसी प्रकार के कट्टरपंथ के खिलाफ हैं, जो संस्कृति के नाम पर बने कानूनों पर सख्ती के साथ पेश आती है। इसी कानून में हिजाब की अनिवार्यता भी आती है, जो 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान में लागू हुआ। पेजेशकियन ने कहा, वह इस कानून की सख्ती के खिलाफ हैं।