ईरान ने वियना में आईएईए जनरल कॉन्फ्रेंस में प्रस्ताव रखने की तैयारी की है, जिसमें परमाणु स्थलों पर हमलों को प्रतिबंधित करने की मांग होगी। यह कदम जून में अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद उठाया गया है। ईरान ने आईएईए पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।
यूएस और इस्राइली हमलों के बाद अब ईरान एक नया दांव चलने जा रहा है। ये देश अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की 69वीं जनरल कॉन्फ्रेंस में ऐसा प्रस्ताव रखने जा रहा है, जिसमें परमाणु स्थलों पर हमलों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की जाएगी। यह कदम जून में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद उठाया गया है। इस प्रस्ताव के जरिये तेहरान परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना चाहता है।
विज्ञापन
ईरान के परमाणु संगठन प्रमुख मोहम्मद इस्लामी वियना पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन आईएईए के रवैये पर सवाल उठाने का मौका है। इस्लामी ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने ईरान पर हुए हमलों की निंदा नहीं की और दोहरा रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि भले ही प्रस्ताव पास न हो, लेकिन यह साफ हो जाएगा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर को कमजोर किया गया है।
अमेरिका का दबाव और सदस्य देशों की लॉबिंग
ईरान के उप परमाणु प्रमुख बेहरूज कमालवंदी ने दावा किया कि अमेरिका सदस्य देशों पर प्रस्ताव का विरोध करने का दबाव बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन एजेंसी को सहायता रोकने की धमकी दे रहा है। ईरान अब सम्मेलन के दौरान अधिक से अधिक देशों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगा। हालांकि तेहरान मानता है कि प्रस्ताव वोटिंग तक भी नहीं पहुंच सकता।
पुराने प्रस्तावों का हवाला
कमालवंदी ने 1981 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पास प्रस्ताव 487 का हवाला दिया, जिसमें इस्राइल के इराक के ओसिराक रिएक्टर पर हमले को यूएन चार्टर का उल्लंघन बताया गया था। उन्होंने 1985 और 1990 में आईएईए द्वारा पारित प्रस्तावों का भी जिक्र किया, जिनमें संरक्षित परमाणु स्थलों की सुरक्षा पर जोर दिया गया था।
परमाणु समझौते और हालिया हमले
2018 में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका के परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने ईरान के खिलाफ चार प्रस्ताव पास किए। जून में ईरान को अनुपालन में विफल बताने के बाद इस्राइल ने 12 दिन तक हमले किए, जिसमें एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। हालांकि इस साल अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और आईएईए दोनों ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा।
निरीक्षण बहाल करने का समझौता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले हफ्ते काहिरा में आईएईए के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत हमले झेल चुके सभी स्थलों पर निरीक्षण बहाल होगा। इस समझौते को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंजूरी दी है। हालांकि कट्टरपंथी सांसदों ने चेतावनी दी है कि निरीक्षण से अमेरिका और इस्राइल को दोबारा हमले का मौका मिल सकता है। अभी निरीक्षकों की पहुंच केवल बुशेहर प्लांट तक है।