फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या अब लद रहे हैं डॉलर के एकछत्र राज करने के दिन? आईएमएफ ने किया ये खुलासा

Fri, 02 Apr 2021 04:15 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

पिछले साल विदेशी मुद्रा भंडारों में यूरोपियन यूनियन की मुद्रा-यूरो का हिस्सा सात फीसदी बढ़ा। ये रकम 2.52 ट्रिलियल डॉलर के बराबर तक पहुंच गई। पिछले साल की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडारों में जमा यूरो में 21.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई...
विज्ञापन
अमेरिकी डॉलर - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले साल विदेशी मुद्रा भंडारों में अमेरिकी डॉलर का हिस्सा 25 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। ये बात अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा आंकड़ों से सामने आई है। गौरतलब है कि डॉलर दुनिया भर में कारोबार की मुख्य मुद्रा है। इसलिए सरकारें अपने विदेशी मुद्रा भंडार में इसकी अधिक से अधिक मात्रा रखने की कोशिश करती हैं।

विज्ञापन


साल 2020 में विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर का हिस्सा गिर कर 59 फीसदी रह गया। इसके पहले 1995 में ये हिस्सा 58 फीसदी रहा था। अब आई इस गिरावट का कुछ कारण तो मुद्राओं की कीमत में उतार-चढ़ाव है, लेकिन एक बड़ा कारण विदेशी व्यापार में दूसरी मुद्राओं खास कर चीन के युआन की बढ़ रही भूमिका भी है।

इसके बावजूद अभी भी दुनिया के अलग-अलग देशों के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा सबसे बड़ा है। पिछले साल की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडारों में सात ट्रिलियन डॉलर जमा था। इसके पहले तीसरी तिमाही में ये रकम 6.939 ट्रिलियन डॉलर थी।
विज्ञापन


पिछले साल विदेशी मुद्रा भंडारों में यूरोपियन यूनियन की मुद्रा-यूरो का हिस्सा सात फीसदी बढ़ा। ये रकम 2.52 ट्रिलियल डॉलर के बराबर तक पहुंच गई। पिछले साल की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडारों में जमा यूरो में 21.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2014 के बाद की यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसके पहले आर्थिक मंदी के समय 2009 में विदेशी मुद्रा भंडारों में यूरो का हिस्सा बढ़ कर 28 फीसदी हो गया था।

बहरहाल, सबसे ज्यादा ध्यान युआन की बढ़ी मात्रा ने खींचा है। पिछले साल सभी चार तिमाहियों में विदेशी मुद्रा भंडारों में युआन की मात्रा बढ़ती रही। साल भर में कुल मिला कर इसमें 2.25 फीसदी बढ़ोतरी हुई। अब दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडारों में इसका हिस्सा नौ फीसदी हो गया है। गौरतलब है कि विदेशी मुद्रा के क्षेत्र में युवान नया खिलाड़ी है।

आईएमएफ ने इसका रिकॉर्ड रखने की शुरुआत 2017 में जाकर की थी। बीते तीन वर्षों में चीन सरकार ने विभिन्न देशों के साथ कारोबार आपसी मुद्रा में करने के समझौते किए हैं। चीन की योजना आखिरकार विदेश व्यापार में डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की है। 2020 में इस बात के संकेत मिले कि चीन अपनी मंशा पूरी करने में भले ही धीमी रफ्तार से, लेकिन सफल हो रहा है। ताजा आंकड़ों को इसी सिलसिले में देखा जा रहा है।

कैनेडियन इम्पेरियल बैंक ऑफ कॉमर्स में स्ट्रेटेजिस्ट बिपन राय ने ब्लूमबर्ग टीवी से कहा- ‘गति धीमी है, लेकिन हम जो देख रहे हैं कि उसका मतलब यह है कि दुनिया बहु-मुद्रा ढांचे की तरफ बढ़ रही है।’ लेकिन अमेरिकी कैपिटल मार्केट ट्रेडिंग फर्म बैनोकबर्न ग्लोबल में स्ट्रेटेजिस्ट मर्क चैंडलर ने वेबसाइट आरटी.कॉम से कहा कि विदशी मुद्रा भंडारों में अमेरिकी डॉलर के हिस्से में आई गिरावट एक अस्थायी घटना है।

इसकी वजह चौथी तिमाही में अलग-अलग मुद्राओं की तुलना में डॉलर की कीमत में आई गिरावट है। उन्होंने कहा कि डॉलर का हिस्सा 59 फीसदी तक आ गिरना महज आंकड़ों का शोर है। इसकी एक वजह डॉलर की कीमत में गिरावट रही, तो दूसरी वजह दुनिया में यूरो की बढ़ी मांग है। लेकिन इस साल की पहली तिमाही में डॉलर की कीमत बढ़ी है, उससे सारी सूरत पलट जाएगी।

लेकिन शेयर बाजार के कुछ जानकारों की राय है कि डॉलर के हिस्से में आई गिरावट स्थायी है। इसकी एक वजह यह भी है कि डॉलर की कीमत में जारी उतार-चढ़ाव के कारण लोग अब सोना या चांदी में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं। वेबसाइट आरटी.कॉम के मुताबिक अमेरिकी स्टॉक ब्रोकर पीटर शिफ ने कुछ पहले एक पॉडकास्ट में कहा था कि डॉलर के एकछत्र राज करने के दिन अब लद रहे हैं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें