चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने अधिकारियों को चेताया है कि बीआरआई प्रोजेक्ट्स के लिए दुनियाभर में माहौल तेजी से जटिल होता जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को प्रोत्साहित किया कि वे रणनीतिक अवसरों को झपटें और अरबों डॉलर की इस परियोजना को मिलने वाली चुनौतियों का सक्रियता से जवाब दें। चीन की इस महत्वपूर्ण परियोजना को अमेरिका के बी3डब्ल्यू योजना से कड़ी चुनौती मिलने वाली है।
राष्ट्रपति जिनपिंग ने शुक्रवार को चीनी अधिकारियों से कहा कि वे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत उच्च गुणवत्तापूर्ण विकास को बढ़ावा देने के सतत साझा प्रयास करते रहें। इसका मकसद लोगों को उच्च मानक वाला, टिकाऊ व जन केंद्रित विकास मुहैया कराना होना चाहिए।
बीआरआई के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय माहौल तेजी से जटिल होने का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति जिनपिंग ने एक परिसंवाद में चीनी अधिकारियों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे दृढ़ प्रतिज्ञ बने रहें, रणनीतिक अवसरों को न छोड़ें, चुनौतियों का सक्रिय से मुकाबला करें और आगे बढ़ें। उन्होंने सहयोग के नए क्षेत्रों- जैसे महामारी नियंत्रण, कम कार्बन उत्सर्जन और ई कॉमर्स में विस्तार का भी सुझाव दिया।
यह पहला मौका है जब जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा जून में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई बी3डब्ल्यू पहल के बाद अपनी बीआरआई योजना के बारे में चर्चा की है। बाइडन द्वारा पेश योजना 'बिल्ड, बैक, बेटर वर्ल्ड' (बी3डब्ल्यू) के तहत विकासशील देशों में मूल्य आधारित, उच्च मानक की पारदर्शी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए वित्तीय संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। इसे चीन की बीआरई परियोजना को जवाब माना जा रहा है। बीआरई परियोजना के तहत चीन भी विकासशील देशों में कई परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है।
हालांकि चीन ने अमेरिका की बी3डब्ल्यू परियोजना से अपनी बीआरआई परियोजना से किसी प्रतिस्पर्धा से इनकार किया है। उसका कहना है कि बीआरआई अंतरराष्ट्रीय सहयोग की खुली परियोजना है।
16 नवंबर को बाइडन के साथ अपने वर्चुअल शिखर सम्मेलन में जिनपिंग ने बीआरआई-बी3डब्ल्यू का परोक्ष जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा था कि चीन की यह वैश्विक पहल अमेरिका के लिए भी खुली है। इसका उल्टा भी सच है। यानी बी3डब्ल्यू चीन के लिए भी खुली है।
चीन ने अपना विश्व व्यापी दबदबा बढ़ाने के लिए अपने 3.21 खरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार के दम पर विश्व के तमाम देशों में बुनियादी ढांचे के विकास की परियोजनाओं के वित्त पोषण व क्रियान्वयन की पहल की है। बीआरआई 2013 में शुरू की गई थी। इसमें चीन के शिनजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाली 60 अरब डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना भी शामिल है। इस पर भारत को ऐतराज है, क्योंकि इसके दायरे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का हिस्सा भी आ रहा है।