Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe
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राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन के अनुरोध पर भारत की प्रतिक्रिया इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है। श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ब्रिज लोन (शॉर्ट टर्म) को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा वह अपने प्रमुख लेनदारों चीन, जापान और भारत से वित्तीय आश्वासन पाने की कोशिश कर रहा है, जो कोलंबों के लिए इस समय बेहद जरूरी है।
पत्रकारों से बात करते हुए विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को यह भी कहा कि उन्हें इस साल की पहली तिमाही में 2.9 अरब डॉलर आईएमएफ से मदद मिलने की उम्मीद है। श्रीलंका ने पिछले साल सितंबर से अपने लेनदारों के साथ ऋण पुनर्गठन वार्ता शुरू की थी। नकदी संकट से जूझ रहे देश ने पहले खुद के डिफॉल्ट होने की घोषणा की थी। इसके बाद बेलआउट के लिए आईएमएफ के साथ बातचीत शुरू की थी।
विक्रमसिंघे ने पहले कहा था कि भारत और श्रीलंका ने ऋण पुनर्गठन पर सफल वार्ता की है और देश चीन के साथ भी चर्चा शुरू करेगा। आईएमएफ बेल आउट को रोक दिया गया है, क्योंकि श्रीलंका मदद के लिए वैश्विक ऋणदाता की शर्त को पूरा करने के लिए लेनदारों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका केवल बीस साल की अवधि में चीनी ऋण चुकाने की अवधि बढ़ाने के लिए चीन की ओर देख रहा था और श्रीलंका ने चीन से अपने कर्ज को कम करने के लिए नहीं कहा था।
विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी के कारण श्रीलंका 2022 में अभूतपूर्व वित्तीय संकट की चपेट में आ गया था, जिसने देश में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी थी, जिसके कारण देश के ताकतवर राजपक्षे परिवार को बाहर भागना पड़ा था। आईएमएफ की सुविधा द्वीप राष्ट्र को बाजारों और एडीबी और विश्व बैंक जैसे अन्य उधार संस्थानों से ब्रिजिंग फाइनेंस प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी।
कर वृद्धि जैसे अपने कड़े आर्थिक उपायों का जिक्र करते हुए विक्रमसिंघे ने कहा कि इस तरह के उपायों से अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिलेगी, हालांकि इससे लोगों को कठिनाइयां होंगी। विक्रमसिंघे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए सरकारी उद्यमों को बेचने पर आमादा थे। सरकार ने श्रीलंका टेलीकॉम और श्रीलंकाई एयरलाइंस के निजीकरण की अपनी योजना को पहले ही स्पष्ट कर दिया था।