ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने शुक्रवार को भारत की जमकर तारीफ की। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में क्लेवरली ने भारत को मिली जी-20 की अध्यक्षता समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'भारत को जी-20 की अध्यक्षता ऐसे समय मिली है, जब पूरी दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक खाद्य आपूर्ति में बाधा और चीन की मुखर होती कार्रवाईयों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय जी-20 की अध्यक्षता मिलना काफी महत्वपूर्ण है।' उन्होंने यह भी बताया कि अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाली जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आएंगे।
विदेश मंत्री ने और क्या-क्या बोला?
ब्रिटेन के विदेश मंत्री क्लेवरली ने से कहा, ''भारत न केवल आर्थिक समृद्धि बल्कि कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाने वाला अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी है। उन्होंने आगे कहा, 'यह एक अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण साल है, क्योंकि हम न केवल यूक्रेन में संघर्ष देख रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया में खाद्य आपूर्ति में व्यवधान का संकट और चीन की बढ़ती कार्रवाईयों को भी देख रहे हैं। इसलिए भारत को G-20 अध्यक्षता अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण समय पर मिली है।
उन्होंने कहा कि वह भारत की अध्यक्षता में जी-20 की "पूर्ण सफलता" की कामना करते हैं। क्लेवरली ने कहा, भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस जी-20 सम्मेलन में हम दुनिया के सामने आने वाले सभी मुद्दों पर बहस करें, न कि केवल उन मुद्दों पर जो शायद इस समय सुर्खियों में हैं।
द्विपक्षीय चर्चा करने की कोशिश भी होगी
क्लेवरली ने भारत के साथ द्विपक्षीय चर्चा के सवाल पर कहा कि मेजबान के तौर पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर काफी बहुत व्यस्त होंगे, लेकिन शायद मैं हमारे संबंधों का दुरुपयोग करूंगा और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करूंगा कि हम लोगों की द्विपक्षीय चर्चा हो सके।
क्लेवरली ने चुटकी भी ली। कहा कि हो सकता है कि हम दोनों को क्रिकेट के बारे में बात करने का अवसर भी मिल जाए। उन्होंने कहा, 'मैं डॉ. जयशंकर के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता हूं। वह बहुत ही विचारशील वार्ताकार हैं और मैं जी20 बैठकों में उनके साथ कुछ समय बिताने के लिए उत्सुक हूं।'
चीन को लताड़ा
ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने चीन को जमकर लताड़ा। उन्होंने इंडो-पैसिफिक और अन्य जगहों पर चीन के आक्रामक व्यवहार को लेकर कहा कि लंदन ने बीजिंग के लिए जो बिंदु बनाया है, वह यह है कि चीन एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है। लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि दुनिया के सभी देश नियमों, विनियमों, उन चीजों का पालन करेंगे जिन्होंने हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सकारात्मक भावना में रखा है। मुझे लगता है कि यह उनके हित में है। यह विश्व के हित में है कि वे ऐसा करें। अगर ऐसा होता है, तो वे बहुत ही महत्वपूर्ण होंगे।
क्लेवरली ने आगे कहा, 'चीन लगभग सभी विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम सभी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं। ये दुनिया के लिए खतरनाक है।'