त्रिशूली नदी में 12 जुलाई को बह गए सात भारतीय यात्रियों और दो बसों की तलाश के लिए भारत से टीम शनिवार को नेपाल पहुंची। दोनों बसों पर 65 यात्री सवार थे। जिनमें से 19 लोगों के शवों को बरामद किया जा चुका है।
त्रिशूली नदी में लापता हुए भारत के सात यात्रियों और दो बसों की तलाश के लिए भारत से बचाव टीम शनिवार को नेपाल पहुंची। 12 जुलाई को भूस्खलन के बाद त्रिशूली नदी में बह गईं बसों की तलाश के लिए नेपील ने भारत से सहायता मांगी थी। जिसके बाद भारतीय टीम चितवन पहुंची है।
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दोनों बसों पर 65 यात्री सवार थे और नारायणघाट-मुग्लिन सड़क खंड पर हादसे के बाद यात्रियों से भरी बस त्रिशूली नदी में बह गई थी। जिसके बाद नदी से 19 शव बरामद हुए हैं।
चितवन के मुख्य जिला अधिकारी इंद्रदेव यादव के मुताबिक घटना की जानकारी मिलने के बाद भारतीय टीम तुरंत कुरिंतर में सशस्त्र पुलिस बल के आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण स्कूल गई थी। इसके बाद टीम घटना स्थल सिमलताल गई और तलाशी अभियान शुरू किया, जो नारायणघाट से लगभग 23 किलोमीटर दूर है।
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यादव ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के 12 कर्मियों सहित भारतीय टीम अभियान के लिए सात दिनों तक नेपाल में रहेगी।
तीन यात्रियों ने कूदकर बचाई थी जान
12 जुलाई को काठमांडू जाने वाली एक बस और राजधानी से गौर जाने वाली दूसरी बस सुबह करीब साढ़े तीन बजे दुर्घटनाग्रस्त हो गईं थी। काठमांडू जाने वाली बस में 24 लोग और गौर जाने वाली बस में 41 लोग सवार थे। बताया यह भी जा रहा है कि दूसरी बस में सवार तीन यात्री कूदकर भागने में सफल रहे थे। बीरगंज से काठमांडू जा रहे 21 यात्रियों के बारे में जानकारी मिली है। घटना के वक्त बस में सात भारतीय नागरिक भी थे।
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने जताया था दुख
त्रिशूली नदी में बस के लापता होने पर प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने दुख व्यक्त किया था और तत्काल खोज और बचाव अभियान के निर्देश दिए थे। साथ ही उन्होंने नागरिकों से आवश्यक सावधानी बरतने का आग्रह किया था।