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सम्मान: भारतीय मूल की पत्रकार मेघा को मिला पुलित्जर, दुनिया के सामने खोली चीन के झूठ की पोल

Sat, 12 Jun 2021 04:45 PM IST
प्रशांत कुमार वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला

सार

भारतीय मूल की महिला पत्रकार मेघा राजगोपालन को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मेघा ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के सामने चीन के झूठ को उजागर किया ।
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मेघा को पुलित्जर पुरस्कार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय मूल की महिला पत्रकार मेघा राजगोपालन को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।  दुनियाभर में पत्रकारिता जगत का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। मेघा राजगोपालन ने दुनिया के सामने चीन के झूठ की पोल खोल कर दी। मेघा ने अपनी रिपोर्ट्स में चीन के डिटेंशन कैंपों में लोगों को दी जा रही यातना की सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर बताया कि चीन ने कैसे लाखों की संख्या में उइगुर मुसलमानों को कैद करके रखा हुआ है। बता दें कि पिछले साल भारत के तीन पत्रकारों को पुलित्जर सम्मान से सम्मानित किया गया था। दार यासीन, मुख्तार खान और चन्नी आनंद को पुलित्जर पुरस्कार मिला था। पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ा सम्मान पुलित्जर पुरस्कार है। यह सबसे पहले 1917 में दिया गया था ।
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 पिता ने बेटी को दी बधाई
मेघा राजगोपालन ने अपने पिता के बधाई संदेश को ट्विटर पर पोस्ट किया । इस मैसेज में उनके पिता मेघा को पुलित्जर पुरस्कार मिलने की बधाई दी है। उनके पिता ने लिखा कि बधाई मेघा, मम्मी ने मुझे अभी यह संदेश भेजा है। पुलित्जर पुरस्कार। बहुत बढ़िया। जिसके जवाब में मेघा ने थैंक्स लिखकर रिप्लाई किया।

खोजी पत्रकारिता के लिए नील बेदी को भी पुलित्जर पुरस्कार
मेघा के साथ इंटरनेट मीडिया के दो पत्रकारों को भी यह सम्मान दिया गया है। भारतीय मूल के पत्रकार नील बेदी को भी रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने फ्लोरिडा में सरकारी अधिकारियों के बच्चे की तस्करी के लिए खोजी पत्रकारिता की थी। जिसमें अपनी रिपोर्टिंग में उसने लड़कियों की तस्करी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। 
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जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की रिपोर्टिंग करने वाली लड़की को भी सम्मान
अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की रिपोर्टिंग करने वाली लड़की को पुलित्जर दिया गया है। इस घटना के बाद अमेरिका ही नहीं, दुनियाभर में नस्लीय हिंसा के विरोध में भारी विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
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