मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि कंपनी ने माधेश रविचंद्रन को बिना नोटिस के नौकरी से निकाल दिया, जबकि ऐसा करने का कोई ठोस कारण नहीं था। कानून के मुताबिक उन्हें कम से कम एक हफ्ते का नोटिस या उसकी तनख्वाह मिलनी चाहिए थी।
ब्रिटेन में काम कर रहे एक भारतीय युवक ने नस्लीय भेदभाव और गलत तरीके से नौकरी से निकाले जाने के मामले में बड़ी कानूनी जीत हासिल की है। लंदन के एक केएफसी फ्रेंचाइजी आउटलेट के खिलाफ दायर मामले में रोजगार न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने भारतीय कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को करीब 66,800 पाउंड (लगभग 70 लाख रुपये) मुआवजा देने का आदेश दिया है।
श्रीलंकाई तमिल मैनेजर ने कहे अपशब्द
तमिलनाडु के रहने वाले माधेश रविचंद्रन ने आरोप लगाया था कि दक्षिण-पूर्वी लंदन स्थित केएफसी आउटलेट में काम के दौरान उनके मैनेजर ने उनके साथ नस्लीय भेदभाव किया और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि उनके श्रीलंकाई तमिल मैनेजर ने उन्हें गुलाम कहा और यह भी कहा कि भारतीय धोखेबाज होते हैं।
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न्यायाधिकरण ने मानी भेदभाव की बात
रोजगार न्यायाधिकरण के जज पॉल एबॉट ने अपने फैसले में कहा कि रविचंद्रन के साथ सीधे तौर पर नस्लीय भेदभाव हुआ। फैसले में कहा गया कि छुट्टी की उनकी मांग केवल इसलिए ठुकरा दी गई क्योंकि वे भारतीय थे, श्रीलंकाई तमिल कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई, उन्हें गुलाम और गाली जैसे शब्दों से अपमानित किया गया। न्यायाधीश ने कहा कि यह व्यवहार साफ तौर पर नस्ल के आधार पर कमतर और अपमानजनक था।
नौकरी छोड़ने के लिए किया मजबूर और गलत तरीके से निकाला
रविचंद्रन ने जनवरी 2023 में केएफसी के वेस्ट विकहम आउटलेट में नौकरी शुरू की थी। कुछ महीनों बाद हालात बिगड़ने लगे। जुलाई 2023 में मैनेजर ने उनसे जरूरत से ज्यादा घंटे काम करने का दबाव डाला। इसी से परेशान होकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का नोटिस दे दिया। इसके बाद भी मैनेजर ने उन्हें फोन पर धमकाया और नस्लीय गालियां दीं। ट्रिब्यूनल ने माना कि इस व्यवहार ने रविचंद्रन की गरिमा को ठेस पहुंचाई।
कितना मुआवजा मिलेगा?
ट्रिब्यूनल ने रविचंद्रन को करीब 62,690 पाउंड मुआवजा और छुट्टी के बकाया और अन्य भुगतान जोड़कर कुल लगभग 66,800 पाउंड (करीब ₹70 लाख) देने का आदेश दिया।
कंपनी को प्रशिक्षण देने का आदेश
इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने केएफसी फ्रेंचाइजी चलाने वाली नेक्सस फूड्स लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह छह महीने के भीतर सभी कर्मचारियों और मैनेजरों के लिए कार्यस्थल पर भेदभाव से जुड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करे।