फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

US: अमेरिका में भारतीय नागरिक को ढाई साल की जेल की सजा, हवाई उपकरण अवैध रूप से रूस भेजने का आरोप

Sat, 17 Jan 2026 03:47 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय नागरिक को ढाई साल जेल की सजा सुनाई है। आरोप है कि भारतीय नागरिक ने उन हवाई उपकरणों को अवैध रूप से रूस भेजने की साजिश रची, जिनके लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। 
विज्ञापन
court - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका में एक 58 वर्षीय भारतीय नागरिक को ढाई साल जेल की सजा सुनाई गई है। भारतीय नागरिक पर आरोप है कि उसने नियंत्रित हवाई उपकरण अवैध रूप से रूस भेजने की साजिश रची। इस हफ़्ते की शुरुआत में सुनाए गए फैसले में, ओरेगन डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी अटॉर्नी स्कॉट ब्रैडफोर्ड ने कहा कि आरोपी संजय कौशिक ने जानबूझकर और मुनाफे के लिए ये साजिश रची। आरोपी संजय कौशिक दिल्ली का निवासी है।
विज्ञापन


क्या हैं भारतीय नागरिक पर आरोप
  • अटॉर्नी ने कहा, 'यह एक सोची-समझी साजिश के तहत बनाई गई योजना थी जिसमें विदेशी साजिशकर्ताओं के साथ तालमेल शामिल था।
  • रूस की प्रतिबंधित कंपनियां भी इस साजिश में शामिल थीं। आरोपी ने कई बार अपने निजी फायदे के लिए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों को कमजोर करने की कोशिश की।'
  • आरोपी ने एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म एक्ट का उल्लंघन किया, जिसके लिए उसे फेडरल जेल में 30 महीने और 36 महीने की सुपरवाइज्ड रिहाई की सजा सुनाई।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन आइजनबर्ग ने इस मामले पर कहा, 'जो लोग अमेरिकी एक्सपोर्ट कंट्रोल कानूनों को चकमा देने की योजना बनाते हैं, खासकर जब इसमें मिलिट्री इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी शामिल होती है - तो उन पर कानून के तहत पूरी सख़्ती से कार्रवाई की जाएगी।'
  • कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, सितंबर 2023 की शुरुआत में, कौशिक ने रूस में कंपनियों के लिए अमेरिका से गैर-कानूनी तरीके से एयरोस्पेस सामान और टेक्नोलॉजी हासिल करने की साजिश रची।
  • कौशिक और उनके साथियों ने ओरेगन स्थित एक सप्लायर से एक एटीट्यूड एंड हेडिंग रेफरेंस सिस्टम (AHRS) खरीदा, जो विमानों के लिए नेविगेशन और फ़्लाइट कंट्रोल डेटा देता है।
  • AHRS जैसे कंपोनेंट्स को रूस सहित कुछ देशों में एक्सपोर्ट करने के लिए वाणिज्य विभाग से लाइसेंस की ज़रूरत होती है। न्याय विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि उपकरण इस बहाने खरीदा गया था कि वे कौशिक और उनकी भारतीय कंपनी के लिए थे, जबकि असल में वे रूस के एंड यूजर्स के लिए थे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें