ईरान के निर्वासित युवराज रेजा पहलवी ने अमेरिका में शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के कई सवालों के जवाब दिए। इस दौरान भारत को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में रेजा पहलवी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को सराहा और कहा कि लोकतांत्रिक ईरान में भी दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे। शाह के इन बयानों के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर जल्द हमला कर सकता है।
ईरान के निर्वासित युवराज रेजा पहलवी ने शुक्रवार को अपने एक बयान में भारत-ईरान संबंधों की तारीफ की और साथ ही कहा कि दोनों देश नए अध्याय की शुरुआत कर सकते हैं। रेजा पहलवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत और ईरान के संबंध दशकों पुराने हैं और उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक ईरान दौरे की यादें भी साझा कीं। रेजा पहलवी द्वारा भारत के साथ संबंधों को लेकर की गई बातचीत के बाद ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर हमला कर सकता है और रेजा पहलवी खुद को ईरान के अगले शाह के तौर पर पेश कर रहे हैं।
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पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के भारत दौरे को किया याद
रेजा पहलवी ने कहा, भारत और ईरान के आधुनिक समय में संबंध मजबूत रहे हैं। रेजा पहलवी ने इंदिरा गांधी के ईरान दौरे को याद करते हुए कहा कि जब भारत की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने ईरान का दौरा किया था, उस वक्त वे बहुत छोटे थे।
रेजा पहलवी ने भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध होने की भी बात कही।
ईरान में लोकतंत्र लाने की पैरवी करते हुए निर्वासित युवराज ने कहा, 'लोकतांत्रिक ईरान प्राकृतिक तौर पर उन देशों के साथ मजबूत संबंध रखेगा, जो लोकतांत्रिक ईरान की संप्रभुता और आजादी का सम्मान करेंगे।'
ईरान और भारत के सांस्कृतिक तौर पर मजबूत संबंध रहे हैं और ब्रिटिश काल में भारत और ईरान भौगोलिक तौर पर भी जुड़े हुए थे।
आजादी और बंटवारे के बाद भारत-ईरान का यह भौगोलिक जुड़ाव टूट गया। शाह के शासनकाल में ईरान का जुड़ाव पाकिस्तान के साथ ज्यादा रहा।
इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के एक लेख के अनुसार, बंटवारे के बाद सबसे पहले पाकिस्तान को मान्यता देने वाले देशों में ईरान भी शामिल था।
साथ ही 1965 और 1971 की लड़ाई में भी ईरान ने पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया था। शाह के शासनकाल में ईरान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा दानदाता भी रहा था।
हालांकि भारत और ईरान के संबंधों को बेहतर करने की कोशिशें जारी रहीं और 1969 में ईरान के शाह और फिर 1973 में तत्कालीन भारतीय पीएम इंदिरा गांधी ने ईरान का दौरा किया था।
इंदिरा गांधी के ईरान दौरे से दोनों देशों के संबंधों में बेहतरी की शुरुआत हुई और जब भारत ने पहली बार परमाणु परीक्षण किया था तो उसके बाद साल 1974 में भी शाह ने भारत का दौरा किया था।
इसके बाद भारत ने ईरान से अपना तेल आयात बढ़ा लिया था। जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंध बेहतर हुए। शाह के बाद इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ भी भारत के संंबंध बेहतर रहे हैं।