ब्रिटेन में आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार भारतीय मूल के नागरिक पर अमेरिका में मुकदमे चलाने पर सहमति के बाद प्रत्यर्पित किया गया है। ब्रिटेन के अधिकारियों ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी। बता दें मदुरै में जन्मे 65 वर्षीय सुंदर नागराजन को मेट्रोपॉलिटन पुलिस की राष्ट्रीय प्रत्यर्पण इकाई ने 18 अप्रैल को पश्चिमी लंदन के हेस स्थित एक स्थान से गिरफ्तार किया था। यूके की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने उस समय लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट को बताया कि नागराजन नामित हिजबुल्लाह आतंकवादी संगठन के वित्त से जुड़ा अकाउंटेंट है।
भारतीय मूल के नागराजन पर चलेगा अमेरिका में केस
बता दें नागराजन शुरू में मानवाधिकारों और दोहरी आपराधिकता के आधार पर अपने प्रत्यर्पण को चुनौती दी थी और प्रत्यर्पण मुकदमा जनवरी 2024 में लंदन में शुरू होने वाला था। यह स्पष्ट नहीं है कि बाद में उसे अमेरिकी अदालत में आरोपों का सामना करने के लिए अपने प्रत्यर्पण पर सहमति क्यों देनी पड़ी। उसकी गिरफ्तारी इस साल की शुरुआत में मेट्रोपॉलिटन पुलिस काउंटर टेररिज्म कमांड द्वारा आतंकवाद को वित्त पोषण करने के संदेह में वेल्स में एक 50 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कार्रवाई के बाद हुई।
दवाओं के तस्करी के आरोप में भारतीय मूल के दो लोगों की जेल
वहीं दूसरे मामले में, भारतीय मूल के दो लोगों को कृषि उपज में छिपाकर रखी दवाओं की तस्करी के आरोप में जेल भेजा गया है। ब्रिटेन में भारतीय मूल के दो व्यक्तियों को लंदन में एक मुकदमे के बाद कुल 34 साल की कैद की सजा सुनाई गई है। उन्हें अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से कृषि उपज के बीच छिपाकर लाई गई दवाओं की तस्करी का दोषी पाया गया है। 61 वर्षीय आनंद त्रिपाठी और 39 वर्षीय वरुण भारद्वाज को डोरमैट बनाने में इस्तेमाल होने वाले नारियल फाइबर के साथ छिपाकर लाई गई सिगरेट पर देय आयात शुल्क की चोरी का भी दोषी ठहराया गया था। यूके की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने कहा कि इस योजना में ड्रग्स और सिगरेट वाले शिपिंग कंटेनरों को खाली करने और अपने नियंत्रण वाले गोदाम में ले जाने के लिए अपनी माल कंपनी का उपयोग कवर के रूप में किया था। इन अवैध शिपमेंटों को फिर संगठित अपराध समूहों द्वारा उतार दिया गया।