अमेरिकी एजेंसी- DSCA की मंजूरी के बाद भारत को क्या मिलेगा
विदेश विभाग ने जिस 131 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अनुमानित लागत वाले जिस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, इससे भारत को इंडो-पैसिफिक समुद्री डोमेन में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके लिए अमेरिका ने संबंधित उपकरणों की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को भी मंजूरी दी है।
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समुद्री क्षेत्र में बेहतर क्षमता हासिल करने का प्रयास, अमेरिकी मंजूरी...
भारत ने समुद्री क्षेत्र में बेहतर क्षमता विकसित करने के लिए अमेरिका से सी विजन दस्तावेजों और रसद से जुड़ी दूसरी चीजों तक पहुंच सुनिश्चित कराने की अपील भी की थी। इसके अलावा 'सी-विजन सॉफ्टवेयर', 'रिमोट सॉफ्टवेयर' और 'विश्लेषण से जुड़ी मदद' वाली खरीद को लेकर भी बात हुई थी। इन आपूर्तियों के लिए अमेरिका सहमत हुआ है या नहीं, इस पर भारतीय अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
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वर्जीनिया का ठेकेदार करेगा आपूर्ति
अमेरिका के मुताबिक भारत को सैन्य हार्डवेयर और रसद को अपने सशस्त्र बलों में शामिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। इससे बुनियादी सैन्य संतुलन में भी कोई बदलाव नहीं होगा। अमेरिकी रक्षा तैयारियों पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। आपूर्ति करने वाला मुख्य ठेकेदार वर्जीनिया के हर्नडन स्थित हॉकआई 360 होगा।
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