ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए सात दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। सातवें दौर की वार्ता पिछले महीने यहां दोनों पक्षों के वार्ताकारों के बीच संपन्न हुई, जिसमें 43 अलग-अलग सत्रों में 11 नीतिगत क्षेत्रों पर तकनीकी चर्चा की गई।
सोमवार को जारी एक बयान में व्यापार विभाग (डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस एंड ट्रेड) द्वारा कवर किए गए नीतिगत क्षेत्रों पर कोई और विवरण जारी नहीं किया गया है। हालांकि, इस बात की पुष्टि की गई है कि आठवें दौर की वार्ता अगले कुछ हफ्तों में होने वाली है। बयान में कहा गया है, 10 फरवरी 2023 को ब्रिटेन और भारत ने एफटीए के लिए सातवें दौर की वार्ता संपन्न की। 43 अलग-अलग सत्रों में 11 नीतिगत क्षेत्रों पर तकनीकी चर्चा आयोजित की गई।
FTA: लंदन में भारत-यूके एफटीए वार्ता का सातवां दौर, बुनियादी ढांचे और ग्रीन मोबिलिटी सेक्टर में निवेश पर फोकस
बयान में कहा गया है कि उन्होंने (दोनों पक्षों) नीति क्षेत्रों में विस्तृत मसौदा संधि के पत्र को भी चर्चा में शामिल किया। वार्ता का आठवां दौर इस वसंत में होने वाला है। अन्य दौर की तरह पिछले महीने का सत्र भी हाइब्रिड तरीके से आयोजित किया गया था, जिसमें कई भारतीय अधिकारी बातचीत के लिए लंदने आए थे और अन्य ने वर्चुअल तरीके से भाग लिया। वैकल्पिक स्थानों के अबतक के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए अगला दौर इस महीने के अंत में नई दिल्ली में होने की उम्मीद है।
पिछले हफ्ते ब्रिटेन के व्यापार मंत्री केमी बडेनोच ने इस बात को दोहराया था कि वह भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने लंदन में लेगाटम इंस्टीट्यूट थिंक टैंक को दिए एक भाषण में कहा था कि यह शुल्क में कटौती और ब्रिटेन की सेवाओं के लिए अवसर खोलने का एक सौदा है, जिससे ब्रिटिश व्यवसायों के लिए 2050 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को बेचना आसान हो जाएगा।
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने बीते सप्ताह जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने एफटीए को अंतिम रूप देने की ब्रिटेन की प्रतिबद्धता की पुष्टि की थी। ब्रिटेन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, द्विपक्षीय व्यापार संबंध 2022 में 34 अरब पाउंड के थे, जो एक वर्ष में 10 अरब पाउंड बढ़े थे।
देश के प्रमुख उद्योग संगठन ब्रिटिश उद्योग परिसंघ (सीबीआई) का अनुमान है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते से 2035 तक भारत के साथ व्यापार में सालाना 3 अरब पाउंड की वृद्धि हो सकती है और पूरे ब्रिटेन में वेतन में तीन अरब पाउंड की वृद्धि हो सकती है।