भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संतुलित और समानतापूर्ण कदम उठाने की अपील की है। भारत ने कहा कि विकासशील देशों को जलवायु वित्त, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण में अधिक सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही, उनकी राष्ट्रीय परिस्थितियों और विकास संबंधी प्राथमिकताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष की ओर से आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत का पक्ष रखा। यह कार्यक्रम आगामी जलवायु सम्मेलन सीओपी31 (COP31) से पहले आयोजित किया गया था। इसका शीर्षक 'भविष्य के अनुकूल धरती: जलवायु कार्रवाई के जरिए विश्वास बहाल करना' था।
नायर ने कहा कि फिजी में प्री-कॉप बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट किया था कि मतभेदों की तुलना में साझा हित अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि COP31 में संतुलित क्रियान्वयन के जरिये विश्वास बहाल किया जाना चाहिए।
विकासशील देशों को मिले वित्त और तकनीक
नायर ने कहा कि जलवायु संबंधी योजनाओं को लागू करते समय देशों की परिस्थितियों और विकास की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है। विकासशील देशों को अपनी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं पर काम करने के लिए व्यावहारिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने जलवायु महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक वित्तीय सहायता, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को जरूरी बताया। नायर ने कहा कि पेरिस समझौते के अनुच्छेद 9.1 के तहत चल रहे कार्य कार्यक्रम में विकसित देशों की जलवायु वित्त संबंधी जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए दायरे और तौर-तरीकों पर पहले स्पष्टता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत सहयोग से अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकते हैं। भारत ने COP31 में बेलम टेक्नोलॉजी इम्प्लीमेंटेशन प्रोग्राम को आगे बढ़ाने और तकनीक हस्तांतरण की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की भी अपील की।
जलवायु अनुकूलन में कमजोर समुदायों पर ध्यान
भारत ने जलवायु अनुकूलन के वैश्विक लक्ष्य को कमजोर और प्रभावित समुदायों की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। नायर ने कहा कि इसके लिए भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध वित्त, तकनीक तथा क्षमता निर्माण की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया को जरूरत से ज्यादा तकनीकी नहीं बनाया जाना चाहिए और न ही देशों पर अतिरिक्त रिपोर्टिंग का बोझ डाला जाना चाहिए।
नायर ने बताया कि भारत अपनी पहली राष्ट्रीय अनुकूलन योजना को अंतिम रूप दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश के 151 संवेदनशील जिलों के 448 गांवों में जलवायु के असर को झेलने में सक्षम कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने वाली जल शक्ति अभियान योजना का भी उल्लेख किया।
न्यायसंगत बदलाव के लिए तंत्र बनाने की मांग
भारत ने ऊर्जा और अर्थव्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया को न्यायसंगत बनाने के लिए एक तंत्र को लागू करने की अपील की। नायर ने कहा कि यह व्यवस्था समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों तथा संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बदलाव की प्रक्रिया में लोगों की आजीविका और देशों की अपनी विकास योजनाओं की रक्षा की जानी चाहिए। नायर ने कार्बन सीमा समायोजन तंत्र जैसे एकतरफा व्यापारिक उपायों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उत्सर्जन का बोझ विकासशील देशों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
भारत की जलवायु उपलब्धियों का किया जिक्र
नायर ने कहा कि भारत ने 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले ही बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर ली है। उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली पहल बताया।
नायर ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के जरिये तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने में भारत की भूमिका का भी जिक्र किया।
जलवायु समझौतों के क्रियान्वयन पर जोर
भारत ने कहा कि जलवायु कार्रवाई समावेशी होनी चाहिए और फैसले आम सहमति के आधार पर लिए जाने चाहिए। नायर ने कहा कि वैश्विक स्टॉकटेक की प्रक्रिया में पहले से तय प्रतिबद्धताओं, विशेष रूप से जलवायु वित्त और उन्हें लागू करने के साधनों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा के दायरे से बाहर नई उत्सर्जन कटौती संबंधी जिम्मेदारियां या किसी खास क्षेत्र के लिए निर्देश थोपने के माध्यम के रूप में नहीं होना चाहिए।
नायर ने COP31 की अध्यक्षता करने वाले पक्षों को भारत का पूरा समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि भारत संतुलित और समानतापूर्ण नतीजे के लिए खुले संवाद, तकनीकी सहयोग और लक्षित क्षमता निर्माण में भागीदारी के लिए तैयार है। उन्होंने विशेष रूप से सबसे अधिक संवेदनशील देशों और समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया।