अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का मुद्दा भी उठाया
परिहार ने कहा कि पाकिस्तान में ईसाइयों, हिंदुओं और सिखों समेत जातीय, सांप्रदायिक और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार आतंकी हमले पूरी दुनिया ने देखे हैं। पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथ को संस्थागत संरक्षण दिया जा रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथ और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार मुख्यधारा के समाज में स्वीकृत विषय हैं, जिससे आतंकवादियों के उद्भव के लिए उपयुक्त वातावरण बना है।
भारत माफ नहीं करेगा
भारत की आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक वैश्विक लड़ाई के बारे में परिहार ने कहा कि भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर काम रहा है और भारत पर आतंकी हमले करने वालों को माफ नहीं करेगा।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद रोधी समिति के अध्यक्ष टीएस तिरुमूर्ति ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की भूमिका सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की तरफ से तमाम ठोस सबूत मुहैयार कराए जाने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की 14 रिपोर्ट में पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों के बारे में चर्चा नहीं की, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। जबकि, विश्व निकाय को सभी भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारियों को समान मानदंडों के साथ पेश करते हुए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
गैर-लाभकारी संस्था के तौर पर बटोरते हैं मदद
परिहार ने बताया कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन भारत में आतंकी हमलों को अंजमा देने के साथ ही इंटरनेट के जरिये भारत के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। इसके अलावा मानवीय सहायता करने वाले गैर लाभकारी संगठनों के तौर पर दुनियाभर से आर्थिक सहायता बटोर रहे हैं। इन हरकतों पर नजर रखने के लिए तुरंत संयुक्त राष्ट्र की एक निगरानी टीम नियुक्त की जानी चाहिए।
इसके साथ ही एफएटीएफ को इस मामले पर खास ध्यान देना चाहिए। परिहार ने इस दौरान आतंकियों की तरफ से ड्रोन के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह बहुत चिंताजनक है। इस तरह के तकनीकी काम पाकिस्तान की सेना और अन्य एजेंसियों की मदद के बिना नहीं हो सकते।
अफगानिस्तान के आतंकियों के स्वर्ग बनने की आशंका
भारत ने चिंता जताई कि तालिबान के कब्जे में अफगानिस्तान फिर से आतंकियों का स्वर्ग बन सकता है। यहां आईएस, अल कायदा और तमाम दूसरे आतंकी सुरक्षित रहकर दुनियाभर में आतंक फैला सकते हैं। भारत ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की ही रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि तालिबान का हक्कानी नेटवर्क के जरिये तमाम आतंकी संगठनों से सीधा और मजबूत रिश्ता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा प्रयासों के अभाव में अफगानिस्तान में पहले ही काबू से बाहर हो चुका है, अब यहां से पूरी दुनिया में आतंक फैलने की आशंका है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल हो शांति : भारत
संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि आर. रवींद्र ने कहा कि 21वीं सदी की शांति व्यवस्था को प्रौद्योगिकी और नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल किया जाना चाहिए। वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की शांति अभियानों पर विशेष समिति की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, यह संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के डिजिटल परिवर्तन की रणनीति के अनुरूप भी है।
रवींद्र ने कहा, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में अग्रणी रहा है और उसने पिछले कुछ वर्षों में 49 संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में दस लाख से ज्यादा सैनिकों की तैनाती की है। इस दौरान 174 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान भी दिया जो सैन्य योगदान देने वाले देशों में सबसे बड़ी संख्या है।
उन्होंने उन सभी पुरुषों और महिलाओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में अपनी व्यावसायिकता, समर्पण और साहस के माध्यम से शांति की रक्षा करना जारी रखा और जिन्होंने शांति के लिए अपनी जान गंवाई। भारतीय दूत ने कहा, मिशन की सफलता व संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना की विश्वसनीयता के लिए एक प्रभावी जनादेश महत्वपूर्ण है। ये अभियान अभियान विशेष रूप से अफ्रीका में अस्थिर सुरक्षा वातावरण में संचालित जटिल बहुआयामी मिशनों के लिए विकसित हुए हैं।
पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे सूची में ही रखने की कवायद
आतंकी फंडिंग रोकने में नाकाम रहने पर पाकिस्तान को फिलहाल वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में ही रखने पर विचार बन रहा है। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पेरिस में 21 फरवरी से 4 मार्च तक चलने वाले एफएटीएफ के पूर्ण अधिवेशन में इस पर फैसला हो सकता है। एफएटीएफ ने आतंकी फंडिंग रोकने में नाकाम रहने पर पाकिस्तान को 2018 से ही ग्रे सूची में डाल रखा है। तब से पाकिस्तान के इस दिशा में किए गए कामकाज की लगातार समीक्षा की जा रही है, लेकिन हर बार उसके प्रदर्शन में कमी पाई गई है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों की संपत्तियां जब्त करने और उन पर कार्रवाई करने में नाकाम रहने पर पाकिस्तान को 2021 के अधिवेशन में भी ग्रे सूची में बरकरार रखा गया था। पाकिस्तान के लगातार ग्रे सूची में बने रहने का कारण उसकी सेना और आईएसआई हैं। ये दोनों संगठन आतंकी गतिविधियां चलाने और दुनिया भर में आतंकवाद को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।