शेरी रहमान ने पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन में कहा कि सिंधु जल संधि संशोधन के संबंध में पत्र की सामग्री अस्पष्ट है। भारत ने पाकिस्तान पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार इस मामले से पूरी तरह से अवगत है और इसके गुण-दोष के आधार पर इससे निपट रही है।
पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने शुक्रवार को कहा कि सिंधु जल संधि की समीक्षा के लिए बातचीत शुरू करने की मांग करने वाला भारत का पत्र (नोटिस) अस्पष्ट है और इस्लामाबाद ने अपने जवाब में दिल्ली से स्पष्टीकरण मांगा है।
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भारत ने इस साल के शुरुआत में पहली बार पाकिस्तान को नोटिस जारी किया था, जिसमें 62 साल पुरानी सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूडी) की समीक्षा और संशोधन करने की मांग की गई थी। भारत की ओर यह कदम इसलिए उठाया गया था क्योंकि पाकिस्तान सीमा पार नदियों से जुड़े मामलों के लिए छह दशक से ज्यादा समय पहले हस्ताक्षरित समझौते के विवाद निवारण तंत्र का पालन करने के लिए अड़ियल रुख अपनाया हुआ था।
शेरी रहमान ने पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन में कहा कि सिंधु जल संधि संशोधन के संबंध में पत्र की सामग्री अस्पष्ट है। भारत ने पाकिस्तान पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार इस मामले से पूरी तरह से अवगत है और इसके गुण-दोष के आधार पर इससे निपट रही है।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया है और एक अप्रैल को भारत को जवाब भेज दिया था, जिसमें उनके पत्र की सामग्री पर भारतीय पक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया था। भारत के पत्र के बारे में सीनेट को अवगत कराते हुए मंत्री रहमान ने कहा कि कोई सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से नहीं बदल सकता। इस संधि पर 1960 में विश्व बैंक के माध्यम से दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि अब तक दोनों देशों के बीच कटुतापूर्ण संबंधों या युद्धों के दौरान भी बहाल रही है।
रहमान ने कहा कि सिंधु जल संधि पाकिस्तान और भारत के बीच एकमात्र अनुमोदित संधि है और 1960 के बाद से दोनों सरकारों के बीच संपन्न विधिवत अनुमोदित संधि द्वारा प्रतिस्थापित नहीं की गई है, और यह लागू एक साधन बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह जरूरी है कि वह संधि का सही मायने में क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संधि के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद करता है कि भारत इसका पालन करेगा।
भारत ने गुरुवार को कहा था कि उसे सीमा पार नदियों के प्रबंधन के लिए सिंधु जल संधि की समीक्षा और संशोधन की मांग करने वाले दो महीने पहले भेजे गए उसके नोटिस पर पाकिस्तान का जवाब मिल गया है। किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं पर मतभेदों को हल करने के लिए विश्व बैंक द्वारा एक तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता अदालत के अध्यक्ष को नियुक्त करने की घोषणा के महीनों बाद नई दिल्ली ने संधि में संशोधन करने के अपने इरादे से पाकिस्तान को नोटिस भेजने का महत्वपूर्ण कदम उठाया।