संरा ने कहा, 'चिंताजनक रूप से इनमें से अधिकतर- 1.7 करोड़ बच्चों - के साल भर में एक भी टीका नहीं लगवाने की आशंका है, जो टीके की पहुंच को लेकर पहले से व्याप्त असमानताओं को और बढ़ाएगा।' वैश्विक निकाय ने कहा कि इनमें से अधिकतर बच्चे संघर्ष प्रभावित समुदायों, बेहद दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले या अनौपचारिक तौर पर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हैं, जहां वे मूलभूत स्वास्थ्य एवं प्रमुख सामाजिक सेवाओं की कमी जैसी कई चुनौतियों का सामना करते हैं।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. द्रोस अदहानोम गेब्रेयेसस ने कहा, 'देश कोविड-19 टीकों को हासिल करने के लिये जूझ रहे हैं लेकिन हम अन्य टीकाकरणों के मामले में पिछड़ गए हैं और बच्चों को खसरा, पोलियो और मेनिंजाइटिस जैसी विनाशकारी लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारियों के जोखिम के लिये छोड़ रहे हैं।'
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि भारत में उन बच्चों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है, जिन्होंने डीटीपी टीके की पहली खुराक नहीं ली है। भारत में 2019 में 14 लाख बच्चों ने डीटीपी-1 टीके की पहली खुराक नहीं ली थी और 2020 में यह संख्या बढ़कर 30 लाख हो गई। एजेंसियों ने कहा कि भारत में विशेष रूप से बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है जहां डीटीपी-3 का दायरा 91 प्रतिशत से घटकर 85 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि 2020 में टीकाकरण सेवाओं में व्यावधान व्यापक थे और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित डब्ल्यूएचओ के दक्षिणपूर्व एशिया और पूर्वी भूमध्य सागरीय क्षेत्र थे।