यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री प्रचंड और विदेश मंत्री से मुलाकात
अपनी यात्रा के दौरान क्वात्रा नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' और विदेश मंत्री पौडयाल से शिष्टाचार भेंट करेंगे। क्वात्रा पहले नेपाल में भारत के राजदूत के रूप में सेवा दे चुके हैं। उम्मीद है कि क्वात्रा अपने नेपाली वार्ताकारों के साथ प्रधानमंत्री प्रचंड की भारत यात्रा की संभावना पर भी चर्चा करेंगे। प्रचंड ने कहा है कि वह अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत आएंगे।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान में कही ये बात
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया कि दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न मामलों जैसे कनेक्टिविटी, बिजली, व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य और सस्कृति जैसे विषयों पर करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि दो मित्र पड़ोसियों के बीच यात्राओं के नियमित आदान-प्रदान की निरंतरता में यह यात्रा है।
त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नेपाली समकक्ष ने किया स्वागत
इससे पहले क्वात्रा का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके नेपाली समकक्ष पौडयाल ने स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक शुरू होने से पहले उन्होंने पौडयाल से वन-टू-वन बैठक की। विदेश सचिव स्तर की द्विपक्षीय बैठक में नेपाल और भारत के सात-सात सदस्यों ने हिस्सा लिया। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में शामिल थे, जबकि संयुक्त सचिव और विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता सेवा लामसाल नेपाली प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में शामिल थे।
प्रचंड के पदभार संभालने के बाद भारत भारत का पहला उच्च स्तरीय दौरा
प्रधानमंत्री प्रचंड के दिसंबर में तीसरी बार पदभार संभालने के बाद भारत की ओर से यह पहली उच्च स्तरीय यात्रा है। क्वात्रा के नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली सहित नेपाल के शीर्ष राजनीतिक नेताओं से भी मिलने की उम्मीद है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा- नेबर्स फर्स्ट पॉलिसी के तहत क्वात्रा का यात्रा
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, यह यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की परंपरा और भारत द्वारा अपनी 'पड़ोसी पहले' (नेबर्स फर्स्ट पॉलिसी) नीति के तहत नेपाल के साथ अपने संबंधों को दी जाने वाली प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए है।' पड़ोसी पहले' की नीति भारतीय विदेश नीति का एक अभिन्न अंग है। यह नीति भारत के दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सौहार्दपूर्ण और समन्वित संबंध बनाने का प्रयास करती है।