संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पी हरीश का बयान
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संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरिष परवथानेनी ने बुधवार को यूएनडीपी प्रशासक के साथ संवाद किया। उन्होंने यूएनडीपी/यूएनएफपीए/यूएनओपीएस कार्यकारी बोर्ड के दूसरे सत्र को संबोधित किया। परवथानेनी ने कहा कि भारत यूएन80 पहल में विकास स्तंभ को सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है। भारत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संरचनाओं, कार्यबल और संचालन मॉडल को वर्तमान वास्तविकताओं के साथ संरेखित करने का समर्थन करता है। उन्होंने मौजूदा प्रणालियों में अनावश्यक बदलावों के प्रति आगाह किया। परवथानेनी ने कहा, "हमें ऐसी चीज को ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए जो खराब नहीं है।" भारत ने राष्ट्रीय स्वामित्व और देश-नेतृत्व वाले विकास मार्गों के महत्व पर जोर दिया। भारत का तर्क है कि समाधान बाहर से थोपे नहीं जाने चाहिए।
राष्ट्रीय प्राथमिकताएं और बहुपक्षीय सहायता
भारत समग्र, समावेशी और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि मॉडल का पक्षधर है। यह राष्ट्रीय स्वामित्व और देश-नेतृत्व वाले विकास मार्गों पर केंद्रित है। भारत मानता है कि समाधान बाहर से तय नहीं होने चाहिए। इसके बजाय, उन्हें सदस्य देशों द्वारा पेश किया जाना चाहिए और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, क्षमताओं व परिस्थितियों से प्रेरित होना चाहिए। परवथानेनी ने जोर दिया कि साझेदार देशों की विकास प्राथमिकताओं का सम्मान हो। बहुपक्षीय सहायता उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप रहनी चाहिए।
- भारत ने यूएन80 पहल में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
- वैश्विक मंच से दो-टूक, विकास समाधान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और परिस्थितियों से प्रेरित होने चाहिए, बाहर से थोपे नहीं जाने चाहिए।
- भारत ने इंडिया-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष और इब्सा कोष के माध्यम से 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक राशि का योगदान किया है।
- राजदूत हरीश बोले- संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली के मुख्य वित्तपोषण में गिरावट चिंताजनक।
- भारत यूएनडीपी में लगातार योगदानकर रहा है, 2030 एजेंडा के लिए बहुपक्षीय सहयोग के प्रति भी प्रतिबद्ध।
यूएनडीपी के साथ भारत का सहयोग
भारतीय राजदूत ने यूएनडीपी के साथ भारत के सहयोग को रेखांकित किया। भारत इंडिया-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष और भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (इब्सा) कोष के माध्यम से संगठन के साथ काम कर रहा है। इन कोषों से भारत ने डिजिटल बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और जलवायु लचीलेपन के लिए 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक दिए हैं। सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) और छोटे द्वीप विकासशील देशों (एसआईडीएस) पर विशेष ध्यान है। ये पहल दक्षिण-दक्षिण सहयोग को दर्शाती हैं। यह विकासशील देशों को ज्ञान साझा करने, क्षमताएं जोड़ने, संसाधन जुटाने और बेहतर शर्तों पर पूंजी पाने में मदद करता है।
वित्तपोषण और भविष्य की प्रतिबद्धता
भारत ने संयुक्त राष्ट्र विकास प्रणाली के वित्तपोषण पर चिंता व्यक्त की, खासकर मुख्य वित्तपोषण में गिरावट पर। पारवथानेनी ने यूएनडीपी के लिए भारत की लगातार मुख्य योगदानकर्ता की भूमिका दोहराई। उन्होंने अन्य साझेदारों से मुख्य वित्तपोषण मजबूत करने का आग्रह किया, ताकि संगठन जल्दी प्रतिक्रिया दे सके, नवाचार कर सके और बड़े पैमाने पर काम कर सके। परवथानेनी ने सहायक महासचिव अहुन्ना एजियाकोनवा और कन्नी विग्नराजा के योगदान को भी स्वीकार किया, जो वर्षों की सेवा के बाद यूएनडीपी से जा रहे हैं। भारत 2030 एजेंडा को आगे बढ़ाने में यूएनडीपी, यूएनएफपीए और यूएनओपीएस के साथ सहयोग जारी रखने को उत्सुक है। नई दिल्ली ने बहुपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।