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UN: 'मानवाधिकार समृद्ध समाज की नींव', संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने शरणार्थियों की स्थिति पर जताई चिंता

Mon, 08 Sep 2025 11:00 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र/जिनेवा

सार

UN: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कई देशों में शरणार्थियों और प्रवासियों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाली नीतियां अब सामान्य होती जा रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों के कुछ समूहों को जमीनी और समुद्री रास्तों से वापस भेजा है। 
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मिजोरम में बांग्लादेशी और म्यांमार के शरणार्थी - फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने सोमवार को कहा कि भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों के कुछ समूहों को जमीनी और समुद्री दोनों रास्तों से वापस भेजा है। उन्होंने यह चिंता भी जताई कि कुछ देशों में प्रवासी और शरणार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाली नीतियां अब सामान्य बनती जा रही हैं। तुर्क ने जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 60वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा, सभी मानव अधिकार एक समृद्ध समाज की ठोस नींव हैं... फिर भी दुनियाभर में ऐसी खतरनाक प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं जो हमारे अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं। 
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तुर्क ने कहा कि कई देशों में ऐसी नीतियां और व्यवहार सामान्य हो गए हैं, जो प्रवासियों और शरणार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान और ईरान ने लाखों अफगान नागरिकों को जबरदस्ती उनके देश वापस भेजा है और भारत ने भी रोहिंग्या मुसलमानों के कुछ समूहों को जमीनी और समुद्री मार्गों से वापस भेजा है। उन्होंने जर्मनी, ग्रीस, हंगरी और कुछ अन्य यूरोपीय देशों की ओर से शरण लेने के अधिकार को सीमित करने के हालिया कदमों को लेकर भी चिंता जताई। 
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अल-सल्वाडोर, दक्षिण सूडान, इस्वातिनी और रवांडा जैसे कई देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जिनके तहत तीसरे देश के नागरिकों को उनके अपने देश के बजाय किसी अन्य देश में वापस भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
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उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का प्रयास है कि हर देश में मानव अधिकारों को बेहतर बनाया जाए और उन्हें बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर बच्चा- चाहे वह भविष्य में किसान बने, डिजिटल कर्मचारी, डॉक्टर या दुकानदार- यह समझे कि मानव अधिकार उसका जन्मसिद्ध अधिकार हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, भारत में अनुमानित 40,000 रोहिंग्या रहते हैं, जिनमें से कम से कम 20,000 संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के साथ पंजीकृत हैं।

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