केंद्र की मोदी सरकार ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि चीनी पत्रकारों को यहां काम में कोई दिक्कत नहीं हो रही है, लेकिन चीन में भारतीय पत्रकारों के लिए ऐसा माहौल नहीं है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि भारत और चीन इस मुद्दे पर संपर्क में हैं।
ड्रैगन ने देश में मौजूद आखिरी भारतीय पत्रकार को भारत वापस जाने के लिए कह दिया है। जिसके बाद एशिया की दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव गहरा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले भारत ने यहां मौजूद चीन के रिपोर्टर के वीजा की अवधि को बढ़ाने से इनकार कर दिया था।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने भारतीय रिपोर्टर को इसी महीने देश छोड़ने के लिए कहा है। जब यह भारतीय पत्रकार देश में वापस आ जाएगा उसके बाद चीन में भारतीय मीडिया का कोई भी प्रतिनिधि नहीं रह जाएगा। बता दें कि साल 2023 की शुरुआत में चीन में चार भारतीय पत्रतार थे, जिसमे से दो पत्रकारों के वीजा नवीनीकरण से अप्रैल में चीन ने इनकार कर दिया था, वहीं, तीसरे पत्रकार ने बीते सप्ताह के आखिर में चीन छोड़ दिया है। हालांकि अभी तक चीन के विदेश मंत्रालय और भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है।
वहीं, बीते माह चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि भारत में एक चीनी पत्रकार बचा है, जिसके वीजा का नवीनीकरण होना है। उसके पहले भारत ने दो चीनी पत्रकारों के वीजा नवीनीकरण के आवेदन को खारिज कर दिया था।
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वहीं, केंद्र की मोदी सरकार ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि चीनी पत्रकारों को यहां काम में कोई दिक्कत नहीं हो रही है, लेकिन चीन में भारतीय पत्रकारों के लिए ऐसा माहौल नहीं है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि भारत और चीन इस मुद्दे पर संपर्क में हैं।
इस मामले से परिचित कुछ अधिकारियों ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि वीजा विवाद की शुरुआत चीन में रिपोर्टिंग में मदद के लिए भारतीय पत्रकारों द्वारा सहायकों को भर्ती करने से हुई थी। चीन ने अपनी पॉलिसी में एक समय पर तीन सहायकों की सीमा तय की है। वहीं, भारत में इस तरह की भर्ती के लिए कोई सीमा नहीं है।