दस्तावेजों में भारत को सैन्य मदद बढ़ाने, अत्याधुनिक सैन्य तकनीकी उपलब्ध कराने की बात है। इन सभी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच काफी हद तक पर कदम उठाये जा चुके हैं। भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) के समूह में सदस्य बनाने की भी बात कही गई है। बता दें कि अमेरिका के मजबूत समर्थन के बावजूद चीन के विरोध की वजह से भारत अभी तक एनएसजी का सदस्य नहीं बन पाया है।
दस्तावेजों में ब्रह्मपुत्र नदी का भी जिक्र है। इस नदी का एक बड़ा हिस्सा चीन से निकलता है, जो भारत होते हुए बंगाल की खाड़ी में जा मिलता है। हाल के दिनों में यह खबर आ रही है कि चीन इसकी मूलधारा के साथ कुछ बदलाव करने की कोशिश कर रहा है। इससे भारत के एक बड़े हिस्से पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
भारत सुरक्षा मामलों पर अमेरिका का पंसदीदा
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने 5 जनवरी को 10 पृष्ठ के दस्तावेज को सार्वजनिक किया था और अब इसे व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ‘यूएस स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क’ दस्तावेज में कहा गया है कि भारत सुरक्षा मामलों पर अमेरिका का पंसदीदा साझेदार है।
गोपनीय दस्तावेजों को लेकर पूछे गए सवाल पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा, ''कुछ अमेरिकी नेता गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की विरासत छोड़कर जाना चाहते हैं। लेकिन इसकी विषयवस्तु से चीन को दबाने, इसे रोकने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के अमेरिका के बुरे इरादों का पता चलता है। या फिर ये कहा जाए कि अमेरिका दादागिरी कायम रखने की रणनीति पर चल रहा है।''