कोरोना वायरस के सच को दुनिया के सामने आने से छिपाना हो या फिर भारत-चीन सीमा पर एकतरफा रिपोर्टिंग करके प्रोपेगंडा फैलाना हो। चीन का सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स इस काम में हमेशा से ही माहिर नजर आता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि ग्लोबल टाइम्स चीन की कम्युनिस्ट सरकार के समर्थन से चलने वाला मुखपत्र है। ग्लोबल टाइम्स चीन का प्रोपगेंडा पूरी दुनिया में फैलाने और युद्ध के लिए मानसिक रूप से उकसाने का काम करता है। अक्सर वह सरकार के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी आलोचना करने से पीछे नहीं हटता।
इसी वजह से यहां चीन की आलोचना करने वाली खबरों को 'झूठा' बताया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के तथ्यों पर सवाल उठाए जाते हैं। सीमा विवाद पर भारत को सबक सिखाने की बात कही जाती है। इस तरह की कवरेज यह साफ दिखाती है कि इस मीडिया संगठन द्वारा एकतरफा जानकारी ही पेश की जाती है। खासतौर से वह जानकारी जो चीनी सरकार के पक्ष में हो। जबकि अन्य देशों में मीडिया सरकार की कारगुजारियों को सामने लाने का काम करती है। ग्लोबल टाइम्स के जरिए आसानी से यह पता चल जाता है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की क्या मंशा है और वह क्या चाहती है।
कोरोना पर आवाज उठाने वाले लापता और मीडिया रहा चुप
कोरोना वायरस के फैलने के बाद से अब तक वुहान से पांच ऐसे व्हिसलब्लोअर गायब हो चुके हैं, जिन्होंने इस सच को दुनिया के सामने रखने की कोशिश की थी। एक की तो मौत भी हो चुकी है। ये लापता व्हिसलब्लोअर कहां है, इस पर ग्लोबल टाइम्स में कोई बात ही नहीं हो रही है।
कई अन्य लापता
चीनी उद्योगपति रेन झिक्यिांग ने सरकार की आलोचना की थी और वह मार्च से लापता हैं। मगर ग्लोबल टाइम्स इस बात कोई बात नहीं करता है। इसी तरह पत्रकार चेन गियूशी, फान बिन और ली जेहुआ का कुछ पता नहीं है। हैरानी की बात है कि ग्लोबल टाइम्स में इस पर कोई खबर नहीं है।
संपादक ने थियानमेन चौक की बर्बरता को ठहराया था सही
ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शीजिन
- फोटो : Social Media
ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्लोबल टाइम्स में पीपुल्स डेली की भी हिस्सेदारी है। पीपुल्स डेली कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना की केंद्रीय समिति का आधिकारिक अखबार है। ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शीजिन भी पार्टी के प्रति वफादार हैं। यह वही ग्लोबल टाइम्स है जिसके संपादक ने थियानमेन चौक पर चीनी फौज द्वारा की गई बर्बरता को सही कहा था।
फैक्ट चेक एजेंसियों ने भी उठाए सवाल
फर्जी खबरों की जांच करने वाली mediabiasfactcheck ने भी पाया है कि ग्लोबल टाइम्स की अधिकतर खबरें एकतरफा होती हैं। इसके मुताबिक ग्लोबल टाइम्स की अधिकतर खबरें चीन की सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में होती हैं। जब भी चीन के प्रति नकारात्मक समाचार की बात होती है, तो यह पक्षपात साफतौर पर दिखाई देता है। इस संस्था ने ग्लोबल टाइम्स को सवालों के घेरे में रखा है और इसे 'मिक्स' रेटिंग दी है।
पिछले साल ही खुली थी झूठ की पोल
पुरानी तस्वीर को छाप झूठा दावा पेश करने की कोशिश की गई
- फोटो : Social Media
पिछले साल अगस्त में हांगकांग में ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास में कार्यरत एक कर्मचारी लापता हो गया। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद चीन ने दावा किया कि वह एक सेक्स वर्कर के साथ पकड़ा गया था और शर्म की वजह से लापता हो गया। ग्लोबल टाइम्स में तस्वीरों के साथ खबर छपी। मगर जब समाचार एजेंसी एएफपी ने फैक्ट चेक किया तो पाया कि जो तस्वीरें छापी गई हैं कि पुरानी हैं और ग्लोबल टाइम्स का दावा झूठा है।
वैश्विक रैंकिंग में भी पीछे
मीडिया की स्वतंत्रता के मामले में भी यह बहुत पीछे है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में 180 में से 177वें स्थान पर है। 1993 में ग्लोबल टाइम्स की शुरुआत हुई। तभी से चीनी सत्तारूढ़ दल के निर्देशों पर यह काम कर रहा है।