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भारत और चीन की सेना ने एलएसी पर पीछे हटाए कदम, जानकार इसे कैसे देखते हैं?

Wed, 08 Jul 2020 11:03 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
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भारतीय-चीनी सेनाएं (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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लंबी बातचीत के बाद अब पूर्वी लद्दाख पर भारत और चीन की सेनाएं एलएसी यानि वास्तविक नियंत्रण रेखा से पीछे हट रही हैं। चीन की सेना के एक किलोमीटर पीछने हटने की खबर है और वैसे ही भारतीय सेना भी अपने कदम पीछे कर रही है लेकिन सेना को पीछे करने की जमीन पर ये स्थिति ऐसी ही रहेगी।

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एक प्रतिरोधक क्षेत्र
इस प्रक्रिया का पहला कदम यह देखा गया कि गलवां घाटी में एक प्रतिरोधक क्षेत्र बनाने के लिए भारत और चीन की सेना अपने पैर पीछे किए। दोनों सेनाओं के डेढ़ किलोमीटर तक दोनों तरफ से अपनी सेना को पीछ लिया है। यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि दोनों सेनाओं के बीच हफ्तों तक टकराव इसलिए चला क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने पेट्रोल प्वाइंट 14 पर टेंट और स्ट्रक्चर बनाना शुरू कर दिया जिसे भारत अपनी तरफ की वास्तविक नियंत्रण रेखा मानता है।

दोनों सेनाओं की आम सहमति सेना को पीछे हटाने का मतलब है प्रतिरोधक क्षेत्र उस इलाके को भी कवर करेगा जहां टकराव से पहले भारतीय सैनिक पेट्रोलिंग करते थे।
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कौैन पेट्रोल करेगा?
इस बफर जोन (प्रतिरोधक क्षेत्र) पर पेट्रोलिंग के लिए भारतीय सेना ने दोनों देशों की पुलिस और पेरामिलिट्री फोर्स को तैनात करने का प्रस्ताव रखा है ताकि सेना के बीच विरोध की संभावनाओं को टाला जा सके। इस तरह की पेट्रोलिंग भारतीय-तिब्बत सीमा बल और चीनी सीमा डिफेंस रेजीमेंट की ओर से किया जा सकता है।

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पैरों से पेट्रोलिंग की पाबंदी के आधार पर 30 जून को हुई कॉर्पस कमांडर की बातचीत में इस बात पर सहमित बनी कि अगले 30 दिनों तक भारतीय सेना पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 तक पेट्रोलिंग नहीं करेगी। 

युद्ध की तीव्रता में कमी?
भारत और चीन की ओर सोमवार को जारी किए गए बयान विशेष मायनों में अलग-अलग हैं। भारत ने मुक्ति के लिए तीव्रता में कमी की जरूरत को बताया है लेकिन बीजिंग की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया। जानकारों का मानना है कि पिछले आठ हफ्तों में भारत और चीन दोनों ने अपने-अपने स्तर पर सेना का विस्तार किया है। 

विश्लेषणों के मुताबिक, एक बिंदू पर खासतौर पर ध्यान देने की जरूरत है कि चीन किसी भी समय एलएसी पर अपनी सेना तैनात कर सकता है।  

गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स 
इस तरह के बफर जोन आने वाले समय में कई जगह देखने को मिलेंगे। पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 पर बुधवार तक बफर जोन बना दिया जाएगा, जबकि पेट्रोलिंग प्वाइंट 17ए (गोगरा) पर बफर जोन बनाने के लिए एक से दो दिन का समय लग सकता है। एक अधिकारी का कहना है कि एक बार दोनों ओर से एलएसी पर सेनाएं हट जाएं तो हम हमारी कथित एलएसी पर दोबारा पेट्रोलिंग शुरू कर देंगे, इसमें पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 भी शामिल है। 

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