उधर, बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के छात्र दानिश बलोच ने कहा कि यहां छात्रों के लिए पीने के साफ पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। इसके लिए मांग करने वाले या आवाज उठाने वाले छात्रों को आतंकवादी तक कहा जा रहा है। एक अन्य छात्रा ने कहा कि बलूचिस्तान में यूनिवर्सिटी सेना की छावनियां लगने लगी हैं। हाॅस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए समय की पाबंदी लगा दी गई है।
छात्र संगठनों का यह भी कहना है कि अपने विचार के लिए भीड़ द्वारा मार दिए गए छात्र मशाल खान की याद में 13 अप्रैल को सार्वजनिक छुट्टी घोषित की जानी चाहिए। मशाल की हत्या 13 अप्रैल 2017 को कर दी गई थी।