जेन-जी के प्रतिनिधि सरकार में हिस्सा नहीं ले रहे, मगर गूगल फॉर्म व गेमिंग एप पर मंत्रियों के नाम भी मांगे जा रहे हैं। इस बीच, सोमवार को जेन-जी के बड़े चेहरों के साथ मिलेनियल्स के प्रमुख लोगों की मुलाकात होनी है, जिस पर सभी की नजर है।
नेपाल की राजधानी काठमांडो में रविवार की सुबह काफी चहल-पहल रही। सड़कों पर इतने वाहन उतरे कि जाम की स्थिति हो गई, लेकिन राजनीति के गलियारों में इससे भी ज्यादा गतिविधियां रहीं। अब जेन-जी के साथ मिलेनियल्स भी आने लगे हैं। यह पीढ़ी जेन-जी से कुछ बड़ी है और नेपाल में अलग-अलग वर्गों में मजबूत दखल रखती है।
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इसी को देखते हुए शनिवार को कई जगहों पर बैठकें हुईं। इसमें प्रमुख समाजसेवियों के अलावा फिल्म, साहित्य व कला जगत से भी लोग जुटे। इतना ही नहीं, नई सरकार में जेन-जी की हिस्सेदारी को लेकर भी अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। गूगल फॉर्म के साथ ही गेमिंग एप प्रमुख टूल बने हुए हैं। कयास लगाया जा रहा है कि दस से 15 दिनों में नई पार्टी बन सकती है। इसमें प्रमुख हिस्सा जेन-जी ही होंगे और मिलेनियल्स मार्गदर्शक होंगे। इसमें नेपाल के मेयर बालेन शाह के कदम पर भी निगाह है कि राजनीति में पार्टी स्तर पर वह किस तरह आगे आएंगे। कहा जा रहा है कि अंतरिम सरकार में जेन-जी की 30% हिस्सेदारी हो सकती है। जहां एक तरफ जेन-जी के प्रमुख नामों के सरकार में हिस्सा न बनने की चर्चा है, तो वहीं गूगल फॉर्म पर मंत्रियों के संभावित नाम मांगे जा रहे हैं। इस फॉर्म का नाम राइट पीपल एट राइट प्लेस रखा गया है। इसमें मंत्रालय लिखे गए हैं और उसके आगे नाम लिखकर राय देनी है। गेमिंग एप डिसकॉर्ड पर भी नाम मांगे जा रहे हैं, लेकिन इस बार लिंक लाइव न करके समूहों के बीच में ही रायशुमारी हो रही है। जेन-जी ग्रुप से एक युवा महिला का नाम तेजी से मंत्री बनने वालों में चर्चा में चल रहा है।
बदल सकती है सियासत...
नेपाल में जेन-जी की आबादी 50 लाख से भी ज्यादा है। इसके अलावा भी जेन-जी को सामान्य जनता का समर्थन मिला है। जेन-जी के प्रमुख 15 से 20 चेहरों के अलावा मिलेनियल्स वर्ग के प्रमुख लोग सोमवार को मिलेंगे। यह अहम बैठक होगी, जिसमें भविष्य को संवारने की कवायद होगी। नई पार्टी बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं। कहा यह भी जा रहा है कि पार्टी बनने के साथ ही देश के पूरे चुनाव सिस्टम में बदलाव की भी मांग उठ सकती है। सीधे राष्ट्रपति के चुनाव का मॉडल अपनाने की बात भी हो सकती है।
60 सेकंड जनरेशन
काठमांडो की फिजाओं में जेन-जी को सिक्स्टी सेकंड जनरेशन के नाम से जाना जाता है। तुरंत फैसले लेती है और तुरंत अमल करना चाहती है। किसी भी बैठक में वक्ताओं को महज कुछ मिनट ही सुना जाता है।
अधिकांश हाथों में आई फोन और महंगी बाइक रखने वाली यह जनरेशन चाहती है कि इस आंदोलन के बाद देश में बड़े स्तर पर बदलाव हों। इसी लिहाज से मिलेनियल्स का रोल काफी अहम हो जाता है। यह एक ऐसे ग्रुप के तौर पर काम रहा है, जो भविष्य के लिहाज से गंभीर फैसले ले सके।
समाजसेवी आनंद मिश्रा का कहना है कि उम्मीद है, अब भ्रष्टाचार से मुक्ति मिले। नेपाल विकास की राह पर चले। युवाओं के सभी वर्गों को साथ आना होगा।
नेपाल की राजनीति में युवाओं की सक्रियता के पहले भी कई उदाहरण हैं। पुष्पलाल श्रेष्ठ ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का गठन 25 साल की उम्र में किया था। दूसरे बड़े नाम रहे तुलसीलाल अमात्य व मनमोहन अधिकारी भी 30 की उम्र में राजनीति में मजबूत दखल रखने लगे थें। बीपी कोईराला और उपेंद्र यादव की पीढ़ी भी 40 साल से कम उम्र में दिग्गजों में शामिल हो गई थी।