संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले एक दशक के दौरान ऐसे लोगों की संख्या में छह करोड़ की गिरावट आई है जिनका पालन-पोषण सही ढंग से नहीं होता है। इनमें अल्पपोषित लोगों में अविकसित या कमजोर बच्चे भी शामिल हैं। लेकिन इस अवधि में वयस्क मोटे लोगों की संख्या देश में बढ़ी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वी और दक्षिण एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं चीन और भारत में अल्पपोषित लोगों की संख्या में कमी आई है। हालात, इतिहास और विकास दर में भिन्नता होने के बावजूद दोनों देशों में अल्पपोषितों की संख्या गिरना बड़ी बात है। रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक आर्थिक विकास, विषमता में कमी और बेसिक चीजों और सेवाओं तक आसान पहुंच की वजह से ऐसा संभव हो पाया है।
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द यूनाइटेड नेशंस (एफएओ), द इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट (आईएफएडी), द यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रंस फंड (यूनीसेफ), द यूएन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) और डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से इस रिपोर्ट को तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के अल्पपोषित बच्चों की संख्या में भी कमी आई है। 2012-16 में यह संख्या 6.20 करोड़ थी जो 2019 में घटकर 4.03 करोड़ हो गई।