पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ आजादी मार्च करते लोग
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पाकिस्तान का माहौल इस समय अपने इतिहास को दोहराता हुआ दिख रहा है। पाकिस्तान में आज तक का रिकॉर्ड है कि उसकी आजादी के बाद से आज तक वहां पर किसी भी प्रधानमंत्री ने अपने शासन काल को पूरा नहीं किया है। वहीं कुछ इसी तरह के दौर से गुजर रहे हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान। जिन पर पाकिस्तान के तेज-तर्रार धर्म गुरु एवं नेता मौलाना फजलुर रहमान भरपूर दबाव बनाते हुए दिख रहे हैं।
जिसके तहत उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्तीफा देने की समयसीमा दी थी। जो रविवार की रात समाप्त हो गई है। जिसके विरोध में उन्होंने इमरान सरकार को पूरा देश बंद करने की धमकी दे दी है। उन्होंने कहा कि जब तक इमरान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तब तक हम प्रदर्शन को जारी रखेंगे।
जमीयत उलेमा ए इस्लाम फज़ल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख रहमान ने दो दिवसीय समयसीमा समाप्त होने के बाद एक प्रदर्शन रैली को संबोधित करते हुए कहा कि 'यह साफ है कि शासक (इमरान खान) को जाना होगा और लोगों को निष्पक्ष चुनाव के जरिए नया शासक चुनने का मौका देना होगा। उनके सामने इस्तीफा देने के सिवा कोई और रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी इस्लामाबाद बंद है अगर वे अपनी बात इसी तरह अड़े रहे तो धीरे-धीरे पूरा देश बंद कर दिया जाएगा। हम अब यही नहीं रुकने वाले, हमारा संघर्ष अंतिम समय तक जारी रहेंगा।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के द्वारा दी गई खबर के मुताबिक जेयूआई-एफ ने भविष्य की कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं के साथ चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), पख्तूनख्वा मिल्ली आवामी पार्टी, कौमी वतन पार्टी, नेशनल पार्टी और आवामी नेशनल पार्टी आदि के नेता शामिल हुए। वही ऐसी आशंका जताई जा रही है कि पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी और पीएमएल-एन प्रमुख शहबाज शरीफ के सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होंगे।
वहीं प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रदर्शनकारियों की इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद पीएमएल-एन और पीपीपी के नेताओं को रिहा कराने के एक साजिश है। वे लोग इस प्रदर्शन के जरिए उन्हें जेल से छुटवाना चाहते हैं।