पाकिस्तान के ग्वादार इलाके में चल रहे जन संघर्ष को देश में अब एक एतिहासिक घटना समझा जाने लगा है। अपने बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए पाकिस्तान में ऐसे जन संघर्ष की मिसालें बहुत कम हैं। आंदोलनकारी अपनी बात सत्ता के ऊंचे हलकों तक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं, इसकी पुष्टि बुधवार को हुई, जब प्रधानमंत्री इमरान खान ने आंदोलनकारियों की मांग मानने के संकेत दिए।
विपक्षी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) भी ग्वादार के आंदोलनकारियों के समर्थन अब खुल कर सामने आ गई है। पार्टी नेता और नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ ने इस आंदोलन को एक ‘एतिहासिक घटना’ बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संविधान ने जो बुनियादी हक लोगों को दिए हैं, ग्वादार के लोग उन्हें हासिल करने के लिए ही संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया ने इस ओर ध्यान खींचा है कि शाहबाज शरीफ ने ये बयान अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से किए गए ट्विट के जरिए दिया। इसका मतलब यह माना गया है कि पीएमएल-नवाज ने इस आंदोलन के पक्ष में अब खुल कर खड़ा होने का फैसला कर लिया है।
शाहबाज शरीफ ने कहा कि ग्वादार के जन आंदोलन ने देश के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह ‘लोगों की आवाज’ सुने, और ‘उनकी समस्याओं’ का तुरंत हल निकाले। ग्वादार क्षेत्र में हजारों लोग महीने भर से धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। वे ट्रॉवलर्स के जरिए समुद्र में गैर कानूनी ढंग से मछली मारने पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही उनकी मांग है कि उनके इलाकों में जन सुविधाएं निर्मित की जाएं और वहां चल रही परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि ग्वादार न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि चीन के लिए भी एक संवेदनशील इलाका है। यहां की बंदरगाह परियोजना चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) प्रोजेक्ट का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि जब से ये परियोजना यहां पहुंची है, तब से ही ट्रॉवलर्स के जरिए मछली मारने का धंधा वहां शुरू हुआ है। उससे स्थानीय मछुआरों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है।