पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। 72 वर्षीय इमरान फिलहाल अलग-अलग आरोपों के तहत जेल में बंद हैं। जिस संस्था ने इमरान खान को नामित किया है, उसका कहना है कि इमरान खान ने अपने जीवन काल में लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भी समर्पित रहे हैं।
राजनीतिक उथल-पुथल और अशांति के कारण संघर्ष कर रहा पाकिस्तान पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की नोबेल नॉमिनेशन के कारण सुर्खियों में है। पाकिस्तान में मानवाधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने वाले पूर्व पीएम इमरान खान के प्रयासों के आधार पर पाकिस्तान वर्ल्ड अलायंस (PWA) ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है। इमरान फिलहाल जेल में बंद हैं। पीडब्लूए की स्थापना पिछले साल दिसंबर में ही हुई है। यह संगठन नॉर्वे के राजनीतिक दल- पार्टी सेंट्रम (Partiet Sentrum) से भी जुड़ा है।
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मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र के लिए उल्लेखनीय काम
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को वर्ल्डकप का खिताब जिता चुके 72 वर्षीय पूर्व खिलाड़ी और अब राजनेता इमरान को नोबेल के लिए नामित किए जाने के संबंध में पार्टी सेंट्रम ने एक्स पर बयान जारी किया। पार्टी सेंट्रम ने लिखा, 'हमें नामांकन करने के अधिकारी शख्स / संस्था के साथ गठबंधन करने की खुशी है। हमने पाकिस्तान में मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र के लिए उल्लेखनीय काम करने में योगदान देने के लिए देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है।'
2019 में भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया
बता दें कि पूर्व पीएम इमरान खान को दक्षिण एशिया में शांति के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए साल 2019 में भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।
नोबेल पुरस्कार इतना चर्चित क्यों?
गौरतलब है कि स्वीडिश आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल का 10 दिसंबर 1896 को निधन हुआ था। अपने जीवनकाल में उन्होंने रसायन विज्ञान, स्वीडिश, रूसी, अंग्रेजी, फ्रेंच और जर्मन भाषाएं सीखीं। अल्फ्रेड नोबेल ने डायनामाइट और अन्य उच्च विस्फोटकों का आविष्कार किया। उनके परिवार ने पीटर्सबर्ग में कारखाना चलाया, जिसमें खदानों के विस्फोटक और अन्य सैन्य उपकरणों का निर्माण किया जाता था। अल्फ्रेड नोबेल की याद में नोबेल पुरस्कार देने की शुरुआत उनकी मौत के पांच वर्ष बाद हुई। पहला नोबल पुरस्कार 10 दिसंबर, 1901 को स्वीडन के स्टॉकहोम में दिया गया। विज्ञान की अलग-अलग शाखाओं- भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा के अलावा साहित्य और शांति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोगों को सम्मानित किया गया था। अल्फ्रेड नोबेल ने निधन से पहले अपनी वसीयत में कहा था कि उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा एक कोष में रखा जाए। इस पर मिलने वाला ब्याज पुरस्कार के रूप में उन लोगों को प्रतिवर्ष वितरित किया जाएगा, जिन्होंने बीते साल के दौरान, मानव जाति को सबसे बड़ा लाभ पहुंचाया होगा। यही कारण है कि नोबेल पुरस्कार को दुनिया में सर्वोच्च नागरिक सम्मान के तौर पर भी देखा जाता है।