इन दिनों पाकिस्तान में राजनीति जोरों पर है। इमरान खान की करीबी सहयोगी और पीटीआई की बड़ी नेता शिरीन मजारी ने मंगलवार को बड़ा झटका देते हुए तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी छोड़ दी और रक्षा प्रतिष्ठानों पर पर हमला करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थकों पर निशाना साधते हुए उनकी निंदा की।
शिरीन मजारी ने 12 मई के बाद से चौथी बार गिरफ्तारी के बाद रिहा होने के बाद सक्रिय राजनीति से अपने इस्तीफे और सेवानिवृत्ति की घोषणा की, जब उन्हें 9 मई को हुई हिंसा के सिलसिले में पुलिस द्वारा उनके आवास से उठाया गया और जेल भेज दिया गया। मजारी को एक अदालत के आदेश पर जेल से रिहा किए जाने के कुछ घंटे बाद सोमवार को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। लाहौर हाईकोर्ट की रावलपिंडी पीठ ने किसी अन्य मामले में मजारी की आवश्यकता न होने पर अधिकारियों को उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया था।
उन्होंने नौ मई को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा की निंदा की और कहा कि उन्होंने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में इसी तरह का एक हलफनामा दिया था। साथ ही कहा कि सिर्फ 9 और 10 मई की हिंसा की ही नहीं, बल्कि मैंने हमेशा हर तरह की हिंसा की निंदा की है, खासतौर पर राज्य के संस्थानों और जनरल हेडक्वार्टर, सुप्रीम कोर्ट और संसद जैसे प्रतीकों के खिलाफ।
इसके बाद उन्होंने खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी और सक्रिय राजनीति को छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि गिरफ्तारी से उनके स्वास्थ्य और परिवार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। आज से, मैं पीटीआई या किसी भी सक्रिय पार्टी का हिस्सा नहीं हूं क्योंकि पहले मेरे लिए, मेरा परिवार, मेरी मां और बच्चे हैं। मजारी ने इमरान खान के शासन में 2018 से 2022 तक मानवाधिकार मंत्री के रूप में कार्य किया था।