गंध के महसूस न होने और स्वाद का पता न चल पाने वाले व्यक्ति में इन लक्षणों की पहचान से उसके क्वारंटीन में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही महामारी के संक्रमण पर शुरुआती चरण में ही काबू में पाया सकता है। जामा की एक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 204 मरीजों का सर्वेक्षण किया। इसमें उन्होंने पाया कि 55 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिनमें स्वाद को लेकर असमर्थता थी। जबकि, लगभग 41 प्रतिशत ऐसे थे जिनमें गंध को सूंघने में असमर्थता के लक्षण पाए गए।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे थे कि किसी व्यक्ति के लगातार सूंघने और स्वाद की क्षमता घटना संक्रमण की संभावना हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि स्वाद या गंध के महसूस न होने जैसी समस्या होने पर कोविड की पहचान कर पहले चरण पर ही उसका निदान किया जा सकता है।